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Wednesday, March 12, 2025

धवल का 16वें बरस में प्रवेश

केवल तिवारी

प्रिय धवल, खूब खुश रहो। इस 10 मार्च को तुम 16वें में प्रवेश कर गए हो। यानी 15 साल के हो गए। हर बार की तरह वह दौर याद आता है जब तुम हुए थे। वसुंधरा में हम लोग रहते थे। कुक्कू प्रार्थना करता था कि मेरा भैया हो जाये। मासूमियत का वह दौर। पिछले दिनों किसी मौके पर तुमने कहा था कि मैं बच्चा ही बना रहता चाहता हूं। बिल्कुल। वही बने रहो। फिर हमारे लिए तो हमेशा रहोगे ही। 










खैर... इन सब बातों से सबसे महत्वपूर्ण और हमारे लिए गर्व का पल है कि इस बार तुम दसवीं की बोर्ड परीक्षा दोगे। एक समय होता था जब हम लोग बोर्ड परीक्षा वाले साल में होते थे तो हर कोई समझता था कि बच्चा ठीकठाक कर ले गया। कुछ बच्चे तो इसके आगे पढ़ाई नहीं कर पाते थे। या तो घर के हालात के कारण या फिर कोई प्रोफेशनल कोर्स जैसे आईटीआई या पोलिटेक्निक में एडमिशन लेने के कारण। हमारे लिए सचमुच यह पल भावुक है। इतना भावुक कि शायद शब्दों में उसे बयां न कर पाऊं। धवल, मैं और मम्मा कभी-कभी तुम्हारे कुछ अवगुणों को सुधारने के लिए तुमसे बात करते हैं, कोशिश करो उन पर अमल करने की। इस बार स्कूल में जब हम लोग पीटीएम में गए तो कई बातें ऐसी हैं जिन्हें हम-तुम जानते हैं, लेकिन शायद इग्नोर कर जाते हैं। कुछ चीजों में अब नियंत्रण बहुत जरूरी है। टाइम मैनेजमेंट करना बहुत जरूरी है। जल्दी ही मैं एक रफ टाइमटेबल बनाऊंगा। उसमें तुम कुछ अमेंडमेंट करना चाहो तो ठीक, नहीं तो वही चलने देंगे। उससे पहले तुम्हारा फिटजी या फिजिक्स वाला फाइनल देखना है। यूं तो तुम्हारे पास समय ही कम होगा, लेकिन कैसे मैनेज करना है, वह देखना होगा। ऑफिस में मेरी किसी से बात हो रही थी, कुछ लोगों ने कहा कि सोशल मीडिया से बच्चे को अब दूर रखना होगा। मैंने बहुत गर्व से कहा कि मेरा बच्चा किसी सोशल मीडिया में एक्टिव नहीं है। उसका कोई निजी फोन भी नहीं है। दसवीं के बाद तुम्हें फोन दिलाएंगे ताकि तुम कई जगह खुद ही आना जाना कर सको और हमारे लगातार संपर्क में रहो। अभी ज्यादा नहीं लिख पाऊंगा। भावुक पल हैं। खूब खुश रहो और स्वस्थ रहो। ईश्वर और बड़ों का तुम पर आशीर्वाद बना रहे। आज तुम्हारे बचपन की कई वीडियो देखीं। कुछ पुरानी फोटो भी देखीं। समय यूं ही चलता रहे।

नोट : यह पत्र तुम्हें बर्थडे पर गिफ्ट करने के लिए लिखा था, लेकिन दिल्ली जाने के कार्यक्रम के कारण प्रिंट नहीं निकाल पाया। दिल्ली से आने के अगले दिन तुम्हारा बर्थडे था। मन से बहुत खुश था। इसीलिए पूरे दिन सजावट में लगा रहा। इससे पहले कुक्कू भैया को लेकर अस्पताल जाने तक थोड़ा परेशान था, लेकिन जब डॉक्टर से मिलकर आए तो राहत मिली। खुशी-खुशी बर्थडे मना। रात में एक विवाह कार्यक्रम में तुम्हारे साथ जाना अच्छा लगा और अपने जानकारों से तुमको मिलवाना बहुत अच्छा लगा। ऐसे ही स्वस्थ रहो। खुश रहो। हमारे परिवार में हम सबका आपस में प्यार ही हम लोगों में एक-दूसरे के लिए गिफ्ट है। सुबह-सुबह तुम्हारा फोन देखना और किसी का मैसेज एवं फोन न देखकर उदास होना भी रोमांचक लगा क्योंकि यह रोमांच एक समय तक ही रहता है, लेकिन हमारी ओर से हमेशा बना रहेगा। खुश रहो बेटे। भैया ने तुम्हारे लिए बहुत कुछ मंगाया। यह पल भी मेरे लिए गर्व करने वाला था। दोनों बच्चे स्वस्थ रहें और तुम्हारी मम्मा प्रसन्न रहे, यही कामना है। 
तुम्हारा पापा

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