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Thursday, April 30, 2026

पूरा परिवार साथ, मिन्नी के विवाहोत्सव की बात

 केवल तिवारी




गौरव संग मनीषा चली

खुशियों की बयार बही

इस मौके पर जुटा परिवार 

रिश्तों में आई वसंत बहार

बीना का स्नेहिल निमंत्रण

नितिन-मानसी का प्रबंधन

मनीषा-गौरव हुए एक-दूजे के

स्वागत करे दीपू हंस-हंस के

कुल देवता से अर्जी हमारी

शुभकार्य होते रहें बारी-बारी। 

गत 26 अप्रैल को जब नोएडा से लौट रहा था तो उक्त पंक्तियां अपने आप मन में चल रही थीं। उसी सुबह हमारी प्यारी मिन्नी यानी मनीषा दुल्हन बनकर गौरव के घर के लिए विदा हुई थीं। तीन दिनों के इस शुभ कार्य में दो दिन मेरी भी सपत्नीक भागीदारी रही। सच में, पता ही नहीं चला कि ये दो दिन कब निकल गये। अपनों से मिलन, पुरानी बातें, भविष्य का दर्शन, पूजा-पाठ का विवरण, बच्चों के भविष्य संबंधी तैयारी से लेकर तमाम बातें हुईं। करीब डेढ़ माह पहले बीना का फोन आ गया था। उन्होंने कहा था कि बिटिया की शादी में आना है और हर कार्यक्रम में शामिल होना है। उसी दौरान नितिन से भी बात हुई, वह बचपन से ही मुझे बड़बाज्यू (दादाजी) बोलता है। रिश्ता ही यही है। उसने भी कहा कि हम लोग कार्यक्रम में समय पर पहुंचें। मिन्नी यानी मनीषा के विवाहोत्सव का मुख्य कार्यक्रम 25 अप्रैल की रात का था। चंडीगढ़ से मैं और भावना (पत्नी) 24 की सुबह निकले और दोपहर होते-होते हम लोग नोएडा सेक्टर 121 स्थित Cleo County अपार्टमेंट पहुंच गये। पहले हरीश से बात हुई, फिर नितिन ने पार्किंग पास बनवाने की औपचारिकता पूरी की। लिफ्ट में चढ़ने की तैयारी ही थी कि मानसी (बीना की बहू, नितिन की पत्नी, मिन्नी की भाभी और लाव्या की मां) अपनी माताजी के साथ मिल गयीं। भावना से इनकी पहली मुलाकात थी। मैं तो कई बार मिल चुका था। मानसी और उनकी माताजी ने सबसे पहले हमें बधाई दी। असल में कुछ दिन पहले ही मेरे छोटे बेटे धवल का रिजल्ट आया था। हमने बधाई स्वीकारी और उन्हें भी बधाई दी मिन्नी के विवाह की। हम लोग बीना के घर पहुंचे। वहां गीत संगीत चल रहा था। बेटियां हों या महिलाएं, उत्सव तो वही होती हैं। फिर हमारे पहाड़ में रिवाज तो बेहतरीन है। पंडित जी मंत्रोच्चारण करते रहते हैं और महिलाएं गीत संगीत। सकूना देवा। गजानन शंभू के नंदन। कुछ मेल-मिलापों के बाद हमसे उसी सोसाइटी में दूसरे फ्लैट 25वीं मंजिल पर चलने के लिए कहा गया। वहां लंच तैयार था। वहां पहुंचे तो कुछ लोग लंच कर रहे थे और कुछ तैयारी में थे। वहां दाज्यू, हेम, हरीश, दीप, प्रकाश आदि से मुलाकात हुई। भोजन के बाद मन हुआ कि कुछ देर सोया जाये। थकान थी। दाल-भात और रायता भी खाया था। लेकिन अपनों से मिलने की खुशी और बातों का लालच। बातों-बातों में पूरा दिन निकल गया। शाम की चाय के बाद तैयारी होने लगी लेडीज संगीत कार्यक्रम की। वहां अन्य सभी लोगों के अलावा नितिन के ससुर जी हरीश शर्मा जी से कुछ देर बात हुई। फिर लेडीज संगीत का यह कार्यक्रम कब शुरू हुआ और कब खत्म, पता ही नहीं चला। परिवार के लोगों के बीच उत्साहपूर्वक सभी ने समूह नृत्य किया और अनेक ने व्यक्तिगत भी। इन सबमें छाये रहे भाई-बहन। लड़के-लड़कियों ने मंच पर पहुंचकर समा बांध दिया। साथ में आई हमारी मिन्नी। अगली सुबह हल्दी के तैयार होने की ताकीद के साथ ही हम लोग 25वीं फ्लोर के फ्लैट में अपनी-अपनी जगह पहुंच गये। अगली सुबह प्रकाश ने गरम पानी और चाय के प्याले के साथ उठाया। उसका प्रबंधन हमेशा बेहतरीन रहता है। किससे क्या काम लेना है, यह भी उसे बखूबी आता है। खैर हम तो अब बुजुर्ग की श्रेणी में आ गये हैं। रिश्ता हमारा बचपन से ही बुजुर्ग वाला है, इसलिए आराम से ही रहे। नयी पीढ़ी के उत्साह को एंजॉय किया। 25 अप्रैल की सुबह हल्दी कार्यक्रम, वहीं नाश्ता हुआ। इसी बीच नितिन के मामा द्वय- दिनेश और मुन्नू से भी कुछ देर वार्तालाप हुई। दोपहर बाद हम कुछ लोग पास ही में एक होटल में चले गये जहां बारात पहुंच रही थी। नितिन ने वहां व्यवस्था देखने को कहा। वहां गौरव (दूल्हे राजा) के पिताजी, भाई समेत करीब-करीब सभी बारातियों से मुलाकात हुई। लखनऊ पूरन जीजा जी के समधी-समधन भी शाम को शादी में पहुंचे, उनके साथ भी अच्छा समय बीता। होटल फिर बैंकट हॉल और शादी व्याह के दौरान अपनों से मुलाकात के इस दौर में रात का एक कब बज गया सच में पता नहीं चला। इस बीच ऐसा लगा जैसे कई मौकों पर मेरे साथ बिपिन (बीना का पति मेरा भतीजा और नितिन, मिन्नी, दीपू के स्वर्गवासी पिता) चल रहा है। ऐसा भी महसूस हुआ जैसे मैं उससे बात कर रहा हूं। असल में, वह रिश्ते में भतीजे जैसा था और हकीकत में दोस्त जैसा। बहुत बातें शेयर करते थे हम लोग। कोरोना काल का दूसरा दौर उसके लिए प्राणघातक हुआ। खैर... वह यादों में तो सदा जीवित रहेगा ही। वह कहीं न कहीं से हम सबको देख रहा होगा। मिन्नी की शादी के इस समारोह में अनेक ऐसे लोग मिले जिन्हें मैं बिपिन की वजह से ही जानता था। वे लोग आए, मुलाकात हुई। कई परिजन भी मिले। हालचाल लिए। इसी बीच मैं एक सोफे पर पसर गया। तभी केक काटकर तालियां बजने की आवाज आई। पता चला कि दीप-ज्योति की शादी की सालगिरह है। मैंने भी वहां जाकर उन दोनों को बधाई दी और फिर दीप मुझे रात करीब ढाई बजे फ्लैट पर ले आया। मेरे लिए एक-दो घंटा सोना जरूरी था क्योंकि अगली सुबह मैंने चंडीगढ़ के लिए लौटना था। बहुत शानदार रहा समूचा आयोजन। पूरे परिवार बधाई के पात्र हैं। 



तिवारी परिवार के बच्चों को सैल्यूट

अमित, नीरज, हितेश, प्रशांत, चिराग, दीपेश, शुभम, सार्थक (लड़कों की टोली) और दीपू, दीया, गुन्ना और उनकी सहेलियां (लड़कियों की टोली)। तिवारी परिवार एवं उनके परिजन के इन बच्चों ने हर कार्यक्रम में समां बांधा। उत्सव सरीखे इन बच्चों ने काम भी निभाया और माहौल को भी आनंदित किया। इनमें से ज्यादातर बच्चों की नौकरी लग चुकी है और कुछ कगार पर हैं। लेडीज संगीत के दौरान ग्रूप डांस हो या फिर दिन में सामान इधर से उधर पहुंचाना। बीच-बीच में घरवालों के साथ तालमेल की बात हो या फिर किसी को गाड़ी से इधर-उधर छोड़ने की। इन सबका उत्साह देखते ही बनता था। हर किसी के निर्देश पर ये अपने डग भर लेते और थकान तो जैसे छू मंतर थी। शायद कभी हम लोग भी ऐसे ही हुआ करते थे। हां काम और उसके तरीके अलग होंगे। इन सभी बच्चों को सैल्यूट। 



साथ बैठकर कीं पुरानी यादें ताजा

काफल, हिसालू, कैरुवा, तरुड़, सम्यो और किलमौड़। इन नामों को पढ़कर किसी के मन में सवाल उठना लाजिमी है, लेकिन ये भी हमारी चर्चा का विषय रहे। असल में हरीश ने गांव की पुरानी बातों को याद किया। इनमें से कुछ फल हैं, जंगली फल और कुछ सब्जी, वह भी जंगल में पाई जाने वाली और एक ऐसी पत्ती जो धूप का काम करती है, वह भी जंगलों में नमी वाले इलाकों में मिलती है। हम सब लोग इन बातों में कई साल पीछे चले गये। मन-मस्तिष्क में एक चित्र सा खिंचने लगा। इसी बीच, कुछ राजनीति पर भी चर्चा शुरू हो गयी। हमारा हरीश सर्वगुण संपन्न है। मेडिकल, विज्ञान की जानकारी के अलावा उसे धर्म-कर्म का भी ज्ञान है। मेहंदी रस्म के दौरान जब उसे तिलक लगाने का काम सौंपा गया तो वह धारा प्रवाह संस्कृत में मंत्रोच्चारण कर रहा था। इसी दौरान अपने जमाई गौरवजी (भतीजी प्रेमा के पति) से भी हमारी बात हो रही थी। जमाई से भी मित्रवत बात हो रही थी। दूसरे जमाई दर्शन जी (भतीजी निर्मला के पति) मुझे शादी वाली शाम ही मिले। वह मेहंदी वाले दिन आए थे, लेकिन उस रात मैं वहां पहुंचा नहीं था। कुल मिलाकर हम लोगों ने ढेरों बात की। इस दौरान हर कोई अपने मोबाइल को भूल गया। यानी हमने इस बात को गलत साबित किया कि सब मोबाइल पर लगे रहते हैं आजकल। बड़े भाई साहब भुवन चंद्र तिवारी जी सबसे सीनियर थे फिर हेम, हरीश, मैं और दीप। साथ ही जमाई गौरव जी और छोटे भतीजे प्रकाश से भी चर्चा होती रही। 


और बीना का काबिल-ए-गौर धैर्य

बीना की बिटिया की विदाई थी। चारों ओर से अनेक कार्यों का प्रेशर होना लाजिमी है। उसके मन में भी भावनाओं-विचारों का समुद्र हिलोरे मार रहा होगा, लेकिन उसके अंदर जबरदस्त धैर्य था। सीखने लायक धैर्य। हर रस्म में हर किसी का ध्यान रखना और सभी कार्यों को सही से संपन्न कराना। अपनी माताजी का हाथ पकड़कर हर जगह ले जाना और बच्चों को जरूरी निर्देश देना। इस बीच, हर किसी से खाने-पीने और डांस करने के लिए पूछना। खुद भी सभी कार्यों में शामिल होना। बीना इसी धैर्य को बनाए रखना और अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना। ऐसे ही शुभ कार्यों में हम सबकी भागीदारी बनी रहे। जय ग्वेल देवता। 


बिपिन की मौजूदगी का अहसास

जैसा कि मैंने शुरू में ही कहा कि इस कार्यक्रम में बिपिन की बात न होना बेईमानी है। मैं उसे समय-समय पर याद कर रहा था। वहां वह सपने में भी आया और हकीकत में भी ऐसा लगा कि बिपिन आसपास ही मौजूद है। भतीजे बिपिन के साथ मित्रवत व्यवहार था। गुलाबी बाग से जब अनेक लोग शादी वाली रात पहुंचे तो सभी से थोड़ी-थोड़ी बात हुई। बिपिन की अनेक वीडियो और फोटो मेरे पास हैं। मेरे बच्चों के नामकरण और अन्न प्रासन में सपरिवार उसकी भागीदारी को याद करता हूं। अनेक मौकों पर दिलासा दिलाने की उसकी अदा को याद करता हूं। गांव अक्सर उसके साथ जाने के कार्यक्रम को याद करता हूं। यादों में जिंदा है बिपिन। उस जहां में भी खुश रहो और अपना आशीर्वाद बनाए रखो।

कुछ तस्वीरें साझा कर रहा हूं 





























Sunday, April 19, 2026

जीवन के करिअर पथ पर धवल-भव्य की पहली सीढ़ी, The Tribune School, PW और शुभकामनाओं से लकदक हुए हम

केवल तिवारी

इरादे नेक हों तो सपने भी साकार होते हैं। अगर सच्ची लगन हो तो रास्ते आसां होते हैं।

गत बुधवार (15 अप्रैल 2026) को छोटे बेटे धवल (Dhawal Tiwari) और उसके साथ पढ़ रहे मामा के बेटे भव्य जोशी (Bhavya Joshi) का दसवीं बोर्ड परीक्षा (CBSE 10th Board Result) का परिणाम आया। भव्य के कारण दोहरी खुशी का विवरण इसी ब्लॉग में आगे आएगा। अभी पहले दूसरा विवरण।

रिजल्ट के वक्त मैं आफिस में था। पत्नी घर पर, बड़ा बेटा एक दिन पहले ही बेंगलुरु पहुंचा था। जिस बच्चे का रिजल्ट आया वह कोचिंग यानी फिजिक्स वाला (Physics Wallah) PW गया था। परिवार के ग्रूप में उसने ही मैसेज किया कि रिजल्ट आ गया। इस बार भी ठीक वैसी ही स्थिति थी जब करीब छह साल पहले बड़े बेटे कार्तिक का दसवीं का परिणाम आया था। उस वक्त में दिल्ली में था और मन कर रहा था कि उड़कर चंडीगढ़ पहुंच जाऊं। खैर इस बार मैं इतनी दूर नहीं था। घर महज पांच सौ मीटर की दूरी पर। मैं इंटरनेट पर परिणाम देखने की कोशिश कर ही रहा था कि बड़ा बेटा और कोचिंग वाले देख चुके थे। सच में बेटे ने कमाल किया था उसके 99.4 प्रतिशत अंक आये। दो विषयों गणित और विज्ञान (maths and science)में शत-प्रतिशत। बहुत खुशी हुई। ऑफिस में काम भी जोरों पर था। आसपास बैठे एक-दो मित्रों को बताया। कुछ लोगों ने बहुत खुशी जताई और बधाई दी। अनेक जगह से फोन आये। कुछ ने कहा कि अपने अखबार (दैनिक ट्रिब्यून) में भी छपवाओ। मैंने कहा, मेरा बेटा नहीं होता तो मैं जोर देकर कहता कि ट्रिब्यून स्कूल का मामला है, इसे छापिये। खुद के बेटे की मार्केटिंग करना मुझे नहीं सुहाया। रात करीब 10 बजे चारू मैडम का फोन आया। उन्होंने बधाई दी। प्रेस रिलीज भेजी और खबर लगाने के लिए कहा। पता चला कि सिटी का पेज रिलीज हो चुका है। साथ ही ताकीद हुई कि कल लगा देना। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे द ट्रिब्यून (The Tribune)के चीफ फोटोग्राफर प्रदीप तिवारी जी का फोन आया। बोले, 'आपको बधाई, बेटे की फोटो भेजो।' मैंने एक फोटो भेज दी। अगले दिन The Tribune में बहुत बेहतरीन ढंग से खबर लगी। वह खबर देखते ही देखते बहुत वायरल हो गयी। इस बीच, बच्चे के कोचिंग सेंटर से फोन आया कि बच्चा और माता-पिता दोनों कोचिंग सेंटर आ जाओ। वहां गए। कुछ बातें हुई। शाम को फिर वरिष्ठ पीआरओ का फोन आया। उन्होंने बताया कि बच्चे का कई चैनल्स पर इंटरव्यू हुआ है। इस बीच हमारे गांव (Ranikhet)में कुछ लोगों ने धवल की बाइट देख ली। फिर तो Whatsapp ग्रूप में बधाई संदेशों का तांता लग गया। भाभी-भतीजी, दीदीयों, भानजों, भानजियों के फोन आने लगे। इसके अगले दिन सकूल गये, इसका जिक्र आगे होगा। इसी दौरान PW से फिर फोन आया। वे लोग घर आए। कुछ लोगों ने धवल के बारे में अन्यत्र खबर छपवाने को कहा। मुझे लगा कि यह कुछ ज्यादा हो रहा है। बेटा धवल भी बहुत असहज हो रहा था। उसे समझाया कि एक-दो दिन की बात है, फिर सब सामान्य हो जाएगा। साथ ही ताकीद की कि कभी भी इस सफलता को अपने दिल-दिमाग पर हावी मत होने देना। अभी तो पहली सीढ़ी है। जीवन में पग-पग पर परीक्षाएं देनी पड़ती हैं। यह सीख हमें हमारी माताजी ने दी। वह भविष्य के प्रति बहुत सकारात्मक रहती थीं और परेशानियों से बहुत घबराती नहीं थी, खुशी के पल में बहुत ज्यादा प्रफुल्लित नहीं होती थीं। हम से कहती थीं, आज थोड़ी परेशानी है तो कोई बात नहीं, कल अच्छा होगा। 

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यह सफलता ऐसे ही नहीं मिली

यह सफलता अनपेक्षित नहीं थी। दसवीं की बोर्ड परीक्षा खत्म होते ही बेटे धवल (Dhawal Tiwari)ने पूछा, 'पापा कितने नंबर आने चाहिए कि आप खुश हो जाओ।' मैंने कहा, बेटा नंबर चाहे जो आएं, आप मुझे मेहनत करते हुए दिख रहे हो, यही बहुत है। उसने एक बार फिर अपना सवाल दोहराया। फिर बोला, प्लीज पापा। मैंने कहा कि तुम्हारा बड़ा भाई भी पूछता था तो मैंने कहा था कि 95 प्लस की तो उम्मीद है। धवल ने तपाक से कहा। आप बेफिक्र रहो, 96 कनफर्म। मैंने भी कहा, हां मुझे भी लग रहा है। असल में बेटा स्कूल और कोचिंग की पढ़ाई के अलावा 6 से सात घंटे अलग से पढ़ाई करता था। उसने स्कूल के दो-दो प्री बोर्ड, कोचिंग के प्री बोर्ड के अलावा घर में हर विषय के सैंपल पेपर पांच-छह बार किए थे। वह तीन घंटे परीक्षा हाल की तरह बैठता, फिर अंसर शीट निकालकर मुझे दे देता। मैं उसे चेक करता। हर बार उसके नंबर 95 से 98 के बीच आते। एकाध बार कहता कि आप इतने खुलकर नंबर मत दो। मैं कहता कि मैं सीबीएसई पैटर्न के आधार पर ही दे रहा हूं। फाइनली परीक्षाएं संपन्न हुईं। रिजल्ट आया और धवल सौ के करीब पहुंचते-पहुंचते बेहतरीन अंकों के साथ पास हुआ। अब आगे की डगर देखनी है। करिअर के सफर में यह पहली डगर है, इसे अच्छी तरह भरा है अब आगे देखना है। ईश्वर धवल को स्वस्थ रखे। 

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प्रिंसिपल रानी पोद्दार मैडम का आशीर्वाद और The Tribune स्कूल के महान टीचर्स 

रिजल्ट के बाद प्रिंसिपल मैडम रानी पोद्दार जी के साथ हुई बातचीत से पहले थोड़ा फ्लैशबैक में जाना चाहूंगा। करीब दो साल पहले जब वह स्कूल की प्रिंसिपल बनीं तो उसी बीच एक PTM मैं जाने का मौका मिला। मैंने पत्नी को बाहर बिठाकर कहा कि मैं नयी प्रिंसिपल से मिलकर आता हूं। मैं उनके ऑफिस में गया और वहां उनकी पीएए मैडम से मिलने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने पूछा, क्या आपने अपाइंमेंट लिया है। मैंने कहा मैं एक पैरेंट के रूप में नहीं, बतौर पत्रकार मिलना चाहता हूं क्योंकि स्कूल के इवेंट को दैनिक ट्रिब्यून के लिए कवर करता हूं। वह मैडम बोलीं, आप चारू मैडम से मिल लो। मैं चुपचाप बाहर आया और घर आ गया। सकारात्मक सोचने की ही हमेशा कोशिश करता हूं इसलिए मान लिया कि अभी रानी मैडम यहां सिस्टम को समझ रही होंगी। ठीक ही है। फिर मुलाकात हो जाएगी। इसके कुछ समय बाद ही मुझे पता चला कि वह मेरे बेटे धवल को भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल (IISER) भेजना चाहती हैं। एक हफ्ते का विज्ञान सेमिनार था। धवल ने घर आकर पूछा पापा क्या जा सकता हूं। उन दिनों किसान आंदोलन चल रहा था। ट्रेनों का Schedule बिगड़ा हुआ था। मन में अनेक आशंकाएं थीं, फिर भी कह दिया कि हां कर देना। साथ ही तारीख पूछकर रिजर्वेशन भी करा लिया। मैंने तय किया कि मैं छोड़कर आऊंगा। उसी रात वापस आकर हफ्तेभर बाद फिर लेने चला जाऊंगा। जाने का और मेरे आने का कनफर्म हो गया, लेकिन धवल के साथ वापसी वाला वेटिंग में था। मुझे लगा कि तब तक कनर्फ्म हो ही जाएगा। खैर... । इधर, मेरे मन में तमाम सवाल थे, उधर प्रिंसिपल मैडम के ऑफिस से फोन आया कि आप स्कूल आ जाएं। मैं अगले दिन तय समय के अनुसार पहुंच गया। वहां अकाउंट सेक्शन में रवींद्र झा जी ने कहा कि आप टिकट शेयर कीजिए और एक अप्लीकेशन लिखिए। मुझे आश्चर्य हुआ कि टिकट के पैसे स्कूल ने दे दिए। फिर उन्होंने कहा कि आप प्रिंसिपल मैडम से मिल लीजिए। जब उनसे मिला तो उनकी सहजता, सरलता और बच्चों के प्रति तन्मयता से गदगद हो गया। फिर याद आए अपने पुराने एक गुरु, जो कहते थे कि किसी के बारे में धारणा बनाने में जल्दबाजी मत करना। बाद में धवल सेमिनार से लौटकर आया। उसके बाद एनुअल फंक्शन में धवल को कुछ पुरस्कार मिले। उस दिन धवल किसी अन्य स्कूल में The Tribune School की ओर से कंप्यूटर संबंधी किसी प्रतियोगिता में भागीदारी के लिए गया था। इधर मैं और पत्नी स्कूल के कार्यक्रम में बैठे थे। मंच से धवल का नाम पुकारा गया। मुझे लगा कि कुछ देर में ही कह दिया जएगा कि धवल यहां मौजूद नहीं है। लेकिन तभी प्रिंसिपल मैडम ने कहा कि धवल के पापा यहां बैठे हैं, वह आ जायें। मैं दौड़ता हुआ गया और पुरस्कार लिया। थोड़ी देर में एक और प्राइज मिला। कुछ देर बार सचिन सर (Sports teacher) मेरे पास आए, बोले, सर आप धवल को जल्दी से ले आओ, उस स्कूल में प्रतियोगिता खत्म हो चुकी है। धवल को एक प्राइज और मिलना है। मैं कुछ सोचने लगा, बोले सर आप सोचो मत, सरप्राइज है, चले जाओ। मैं करीब आधे घंटे में लौटकर आया। जैसे ही धवल गेट पर पहुंचा, मंच से घोषणा हुई आल राउंडर की। धवल दौड़कर गया, प्रिंसिपल मैम ने उसे पुचकारा और उसे आल राउंडर का प्राइज मिला। इसके बाद एक दिन विशेष पीटीएम में प्रिंसिपल रानी जी का अलग अंदाज दिखा। टीचर्स, प्रिंसिपल और स्कूल मैनेजमेंट कमेटी सदस्यों के बजाय उन्होंने पैरेंट्स को बोलने का मौका दिया। हर किसी ने अपने अनुभव साझा किए। स्कूल में यह नया अंदाज सबको भाया। मुझे भी उस दौरान बोलने का मौका मिला। वैसे मैं खुशकिस्मत हूं कि अनेक स्कूलों जिनमें द ट्रिब्यून स्कूल भी शामिल है, में मुझे मोटिवेशनल स्पीच के लिए बुलाया जाता रहा है। साथ ही कहानी-कविता लेखन पर भी बोलने का मौका अतीत में मिला है। अब जब धवल का रिजल्ट आया तो प्रिंसिपल रानी पोद्दार मैडम का खुद फोन आया। अगले दिन धवल को लेकर मैं और पत्नी भावना उनके ऑफिस गए। वहां मैडम ने अपने अनुभव बताये। अतीत की कई बातें बताईं, साथ ही बच्चों को समझाने डांटने के भी कई किस्से। प्रिंसिपल मैडम ने बताया कि The Tribune Trust Chairman Mr. NN Vohra सर का धवल का नाम लेकर मेल आया है कि उसको आशीर्वाद देना है। इस बच्चे ने जस्ट 100 को टच किया है। यह बात सुनकर मैं बेहद भावुक हो गया और खुद को बहुत blessed माना। बातों-बातों में प्रिंसिपल मैडम ने हमारी (मेरी और पत्नी) की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि बच्चे की मेहनत के साथ ही आप लोगों का संघर्ष भी मायने रखता है। मैंने कहा मैडम मुझसे ज्यादा तो सचमुच पत्नी का devotion है। उसने कई पारिवारिक कार्यक्रमों में भी नहीं जाने का निर्णय लिया, जबकि मैं तो तमाम आयोजनों में भी शिरकत करता रहा। 

प्रिंसिपल मैडम से बातचीत के दौरान चारू मैडम ने हमारी फोटो खींची (ब्लॉग में फोटो ऊपर साझा की है)। ट्रिब्यून स्कूल में शुरू से ही रजनी मैडम, निधि मैडम, रंजू मैडम, कुसुम मैडम, बिनेश सर, सचिन सर, आशीष सर, आशू सर, अतुल सर, पनीत मैम, मीनू मैडम, अंजना मैडम, रुचि मैडम, समर मैडम, विनिमा मैडम, आशा मैडम के साथ ही पहले से वंदना सक्सेना मैडम (पूर्व प्रिंसिपल : इनसे भी बच्चों को बहुत गाइडेंस मिला), अनुपमा मैडम, सीमा मैडम, सीमाश्री मैडम, निकिता मैडम, अवलीन मैडम सहित अनेक टीचर्स का सहयोग रहा। इन सबके साथ ही चांद नेहरू मैडम (स्कूल कमेटी मेंबर) ने कई बार मोटिवेशनल स्पीच देकर हौसला बढ़ाया। इस स्कूल से अतीत और वर्तमान में मिले सहयोग को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। महान संतों के कुछ दोहे हैं, उन्हीं के जरिये अपनी भावनाओं को व्यक्त करना चाहता हूं।

सब धरती कागद करूं, लेखनि सब वनराय, सात समंद की मसि करूं, गुरु गुन लिखा न जाय।

गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट। अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट।

राम नाम के पटतरे देबे को कछु नाहीं, कह लौं गुरु संतोषिये हौस रही मन माहिं।

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PW के टीचर्स और स्टाफ का भी धन्यवाद

बड़े बेटे कार्तिक ने अपने अनुभव हम लोगों से साझा करते हुए कहा कि धवल को आठवीं से ही कोचिंग भेज दो। हमने धवल के मन को टटोला, वह भी ऐसा चाहता था। हमारी ओर से कोई जोर-जबरदस्ती नहीं थी। फिर तय हुआ कि ऑनलाइन स्कॉलरशिप को देखो, कहीं मिल गयी तो कोचिंग भेज देंगे। उस वक्त फिटजी में टेस्ट हो रहे थे। इसने 90 प्रतिशत स्कॉलरशिप के लायक अपना काम कर दिया। धवल को हमने वहां भेज दिया। कम पैसे में काम बन गया। बहुत दुखद रहा कि फिटजी एक साल बाद ही बंद हो गया। फिर हमें सुझाव मिला कि Physics Wallah यानी PW में जायें। वहां बच्चे का एक जनरल टेस्ट हुआ। फिर फीस में कुछ छूट के साथ एडमिशन मिल गया। यहां का पूरा स्टाफ और सभी टीचर्स मसनल- रीटा मैडम, अंकित सर, रागिनी मैडम, खुशबू मैडम, शुभम सिंगला सर, शुभम सर आदि सभी का बहुत सहयोग मिला। पीटीएम में सभी टीचर जरूरी सुझाव देते और जरूरत पड़ने पर स्टाफ ने भी मदद की। इस दौरान अलख पांडेय जी के बारे में जानने-सुनने की जिज्ञासा हुई। वही इस संस्थान के फाउंडर मेंबर हैं। उन पर बनी बायोपिक देखी। उनके अनेक वीडियो देखे। कपिल शर्मा शो में उनको देखा और उनके विचार नेक लगे। इसी बीच, बोर्ड परीक्षाओं के आते-आते हमें फिजिक्स वाला की ओर से बताया गया कि बच्चे का बेहतरीन परफारमेंस रहा है, इसलिए इसे स्कॉलरशिप ऑफर की जाती है। हमने एडॉप्ट कर ली। बच्चा लगातार वहीं पढ़ रहा है। आगे की राह और कठिन है, लेकिन घबराना नहीं। धवल बहुत बधाई, आशीर्वाद। खुश रहो और स्वस्थ रहो। 

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और भव्य जोशी ने किया नाम रोशन

इस पूरे ब्लॉग में अगर भव्य का जिक्र न हो तो यह ब्लॉग अधूरा है। दरअसल भव्य जोशी धवल का क्लासमेट है। इससे पहले वह मेरी पत्नी भावना के जुड़वां भाई भास्कर जोशी का सुपुत्र है। भास्कर का दो साल पहले चंडीगढ़ ट्रांसफर हो गया। उन्होंने और उनकी पत्नी प्रीति ने इसके एडमिशन की बात की। हम लोग पहले एसडी स्कूल, सेक्टर 32 गये। वहां कुछ पैसे जमा कर सीट बुक करवा ली। यह बुकिंग भव्य के पिछले रिकॉर्ड को देखकर हुई। वह भी लगातार बेहतरीन अकेडमिक रिकॉर्ड वाला बच्चा रहा है। फिर भास्कर ने इच्छा जताई कि उसका भी ट्रिब्यून स्कूल में एडमिशन हो जाये तो। मैंने स्कूल में संपर्क साधा। आशू सर ने बताया कि रिटन टेस्ट होगा। भव्य का किसी तरह एडमिशन हो गया। अब वह भी करीब 97 प्रतिशत अंकों के साथ टॉपर्स में शुमार है। धन्यवाद भव्य तुमने स्कूल के साथ-साथ मेरा भी नाम रोशन किया क्योंकि स्कूल वाले अक्सर कहते थे और कह रहे हैं कि आपने लाजवाब बच्चे का एडमिशन कराया। अपनी इस छवि को बनाये रखना। हम सबका आशीर्वाद तुम्हारे ऊपर है। भव्य के माता-पिता और बुआ को भी बधाई।

संबंधित कुछ फोटो कटिंग साझा कर रहा हूं 





Thursday, April 16, 2026

वह ईजा कहां नजर आनी थी...

 केवल तिवारी

उन्हीं की बातें, उन्हीं की परछाई

उस भीड़ में वह नजर नहीं आई।

इस बार कोटाबाग का दौरा

उन्हीं के कारण

यहां, वहां और हर जगह

हर कोई मिला, उन्हीं की वजह

ईजा ऐसा कहती थीं, वैसा करती थीं

हर किसी से अपनत्व से मिलती थीं

संघर्षों की प्रतिमूर्ति

सकारात्मक सोच

और निराशा से पूरा संकोच

मेरी निगाहें भी उन्हें तलाश रही थीं

वह ईजा कहां नजर आनी थीं





एक तस्वीर एकटक देख रही थी

मानो कह रही थी

ये दुनिया आनी-जानी

कुछ अनजानी, कुछ पहचानी

चलते रहो अपने पथ

बड़ों का सम्मान

छोटों को प्यार

इसी को बना लो 

जीवन आधार

अब ईजा की तस्वीर ही थी 

 वह तो उस जहां में चली गई थीं

जहां से न आएगा कोई संदेश

उनकी बातें, उनकी यादें

अब तो रह गयीं शेष

पीपल को दिया पानी

ईजा को श्रद्धांजलि

पत्नी की दीदी की सास

साढू भाई की माताजी

अपनत्व हम भी उनमें पाते 

मिलते-जुलते, हंसते-गाते

उस जहां में खुश रहना ईजा

आशीर्वाद अपना बनाए रखना ईजा

दिल से करता हूं नमन

सब पर कृपा बनाना ईजा।









Tuesday, April 7, 2026

दिल्ली में देश के प्रथम राष्ट्रीय ज्योतिष महाकुंभ का हुआ भव्य आयोजन


फजले गुफरान 

हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, जो हजारों वर्षों से लोगों का मार्गदर्शन कर रहा है। लेकिन आज के आधुनिक युग में हमें विज्ञान और परंपरा दोनों को साथ लेकर चलना चाहिए। यह कहना है केंद्रीय राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा का, वे शनिवार को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित एस्ट्रो कल्चरल महोत्सव कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर प्राचीन विद्या का उपयोग सही मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच के लिए किया जाए, तो यह समाज के लिए काफी उपयोगी हो सकती हैं। दिल्ली विधान सभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि मानव अस्तित्व और ब्रह्माण्ड के बीच गहरे विश्वास को दर्शाने वाली ज्योतिष विद्या 21वीं सदी में भी अत्यंत प्रासंगिक है, आज के दौर में संवाद की गति बहुत तीव्र है, ऐसे में पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने वाले मंच सामाजिक दायित्व और सद्वाव बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे ने कहा की ज्योतिष शास्त्र हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति और वेदों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण विद्या है, जिसने सदियों से मानव जीवन का मार्गदर्शन किया है। इसका उपयोग सकारात्मक सोच और समाज के कल्याण के लिए होना चाहिए। 

भव्य एवं ऐतिहासिक “राष्ट्रीय ज्योतिष महाकुंभ-एस्ट्रो कल्चरल महोत्सव” में देश भर के जाने-माने ज्योतिषी एक मंच पर एकत्र हुए। इस अवसर पर लाइफ डिज़ाइनर एवं वास्तु केंद्र–ज्योतिष एंड रिसर्च सेंटर के संस्थापक कुणाल कुमार ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र जीवन की समस्याओं और संभावनाओं को समझने का एक वैज्ञानिक आधारित दृष्टिकोण प्रदान करता है, न कि सिर्फ भविष्य कहने वाला एक साधन।

रियल एस्टेट की दुनिया में एक अलग पहचान बना चुके राम रतन ग्रुप के चेयरमैन विजय राम रतन ने भी ज्योतिष कॉन्क्लेव में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। उन्होंने इस कॉन्क्लेव में रियल एस्टेट में ज्योतिष के महत्व पर चर्चा की। 

ज्वेलरी की वैज्ञानिक रूप से पहचान, परीक्षण और प्रमाण पत्र देने वाली संस्था Gem Lab के डायरेक्टर दविंदर सिंह को एस्ट्रो महाकुम्भ में सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि Gem Lab का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई रत्न क्यों, कैसे और कितना वास्तविक है — ताकि खरीदार धोखे से बच सके और उसकी कीमत सही मिले।

Help U Educational and Charitable Trust के संस्थापक और प्रबंध ट्रस्टी डॉ. हर्षवर्धन अग्रवाल ने एस्ट्रो कल्चरल महोत्सव पर सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि सारे अच्छे काम नीति निर्माण और बेहतर प्रशासन से ही संभव हो सकते हैं। कोटा स्थित ALLEN Career Institute के सह-संस्थापक और निदेशक ब्रजेश महेश्वरी भी इस मौके पर सम्मानित किये गए।

डी एच डिस्कवरी इलेक्ट्रॉनिक्स के डायरेक्टर तलविंदर सिंह लाली ने एस्ट्रो कल्चरल महोत्सव कॉन्क्लेव में विशेष सहयोग दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सनातन से जुड़े हर आयोजन को वे अपने स्पीकर्स के जरिए नई पहचान देंगे। उनका उद्देश्य है—हर आध्यात्मिक आवाज को दूर-दूर तक पहुंचाना और उसे सशक्त बनाना।

एस्ट्रोलोजर एआई के जरिये ज्योतिष का ज्ञान दे रहे एस्ट्रोज एआई के सीईओ प्रतीक पाण्डेय ने एस्ट्रो की दुनिया के कई रहस्यों से पर्दा उठाया। 

स्प्रिचुअल एडवाइजर और क्रिएटिव Entrepreneur/Strategist केवल कपूर को इस कार्यक्रम में विशेष रूप से सम्मानित किया गया। 

महोत्सव को सेलेब्रिटी एस्ट्रोलॉजर डॉ वाई राखी, जी डी वशिष्ठ, अजय भाम्बी, कुनाल वास्तु केंद्र के संस्थापक कुनाल कुमार, फादर ऑफ़ एस्ट्रोलोजी के नाम से मशहूर विवेक त्रिपाठी, अनिल वत्स, डॉ. नीति शर्मा और सारथी त्रिशला चतुर्वेदी, एस्ट्रो अंकित, आचार्य शुभेश शर्मन, कॉर्पोरेट वास्तु एक्सपर्ट मनोज जैन, रीतू सिंह, आचार्य विक्रमादित्य, प्रोफेसर (डॉक्टर) ज्योतिषाचार्य सुजाता शर्मा, ज्योतिष रतन के डॉक्टर अरविन्द कुमार, ज्योतिषाचार्य सतेंदर प्रकाश, अंक ज्योतिष के जानकार राही रामेश यादव, वास्तु एक्सपर्ट पवन भाटिया, एस्ट्रोलॉजर डॉक्टर श्वेता शर्मा ने भी संबोधित किया। कथा वाचक वर्धा नारायण, अंक ज्योतिषी अनुराग पुरी, रिद्धि सिद्धि एडवरटाइजिंग एजेंसी के सीईओ विनय धींगरा एवं संदीप कुमार के आलावा म्यूजिक वैली के डायरेक्टर योगेश शर्मा, समाजसेवक राशिद इस्माईल, सुधाकर गैसोलिन से आशी जैन, मेघदूत ग्रामो उद्योग सेवा संस्थान के डायरेक्टर विवेक शुक्ला, अनुभूति संस्था के प्रेसिडेंट संजय गौतम मौजूद रहे।

एस्ट्रो कल्चरल महोत्सव में नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार रास बिहारी, वरिष्ठ पत्रकार अशोक किंकर, दधिबल यादव, राकेश थपलियाल, खरी कसौटी नेशनल न्यूज़ पेपर के प्रधान संपादक के सी विश्नोई व वरिष्ठ पत्रकार संजय पोद्दार, वरिष्ठ पत्रकार एवं टीवी एंकर डॉ श्रीवर्धन त्रिवेदी, अनुराग मुस्कान, विकास कौशिक, प्रवीण तिवारी, हिमांशी सिंह आदि मौजूद रहे।  

आखिर में कार्यक्रम के आयोजक प्रदीप श्रीवास्तव एवं फजले गुफरान ने एस्ट्रो कल्चरल महोत्सव के सफल आयोजन पर सभी अतिथियों और सहयोगियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार और एस्ट्रोलॉजी विधि से जुड़े लोगों का सहयोग और समर्थन मिलता रहा तो एस्ट्रो महाकुंभ देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित किया जाएगा।




Wednesday, April 1, 2026

कुक्कू का यज्ञोपवीत संस्कार, धार्मिक स्थल पर दिखा मेरा परिवार

केवल तिवारी

कुक्कू की जनेऊ करवाई,

मां बहुत याद आई।

लग रहा था उस जहां

से बरस रहा आशीर्वाद

तभी तो सब लोगों

ने मिलकर

पूर्ण कर दिया काज।

आचार्य गोविंद वल्लभ जी का

दिल से धन्यवाद

पंडित केवलानंद जी का

हार्दिक आभार।

सचमुच अनूठी परंपरा है हमारे यहां। हर शुभ कार्य के मौके पर पूर्वजों को याद किया जाता है। लखनऊ से भाभी (राधा तिवारी) संग पहुंचे दाज्यू (भुवन चंद्र तिवारी) जब आवदेव (पितरों का विशेष पूजन) में बैठे और पंडित जी ने दादा, पिताजी, माताजी का नाम लेने को कहा तो मैं भावुक हो गया। अपने पितरों की विस्तृत कहानी क्या कहनी, लेकिन माताजी, ससुर जी, तीन जीजाजी और कोरोना का ग्रास बने बिपिन की बहुत याद आई। माताजी यानी ईजा कुक्कू को मेरी तरह नफरी कहती थी। मेरे ससुर इसे गोबर गणेश कहते थे। बचपन में यह ज्यादा तंग नहीं करता था, अब तो बिल्कुल ही नहीं करता। खैर... चलिए पितरों का पूजन हो रहा था तो उनकी याद आनी लाजिमी थी, लेकिन साथ लग रहा था कि गंगा किनारे उस जहां से सभी पितर आशीर्वाद दे रहे हैं और इसी आशीर्वाद का परिणाम था कि कुछ दिनों से मन में हो रही धुकर-धुकर से इतर आखिरकार मेरे ज्येष्ठ सुपुत्र कार्तिक तिवारी का जनेऊ संस्कार निर्विघ्न संपन्न हो गया। तमाम किंतु-परंतु से हटकर हरिद्वार जाना बहुत आनंददायक और आध्यात्मिक रहा। इस आयोजन में आये लोगों से मुझे बल मिला और महसूस हुआ कि मैं अकेला नहीं हूं। कामकाज के मौके पर मेरा परिवार मेरे साथ है। आचार्य गोविंद वल्लभ जोशी जी का दिल से धन्यवाद है क्योंकि उन्होंने पंडित केवलानंद पांडेय जी से परिचय करवाया और पांडेय जी ने ही हरिद्वार में पूजा संपन्न कराई। उनकी बुलंद आवाज और लयबद्ध श्लोक उच्चारण से आत्मिक शांति मिली और मां गंगा की आरती के दिव्य दर्शन हुए। मैं खुशकिस्मत हूं कि श्रेष्ठ ब्राह्मण माने जाने वाले भानजे-भानजियों में अनुपात समान है। यानी पांच भानजियां और पांच भानजे। कुछ कारणों से सब नहीं पहुंच पाये, लेकिन प्रिय गौरव के अलावा भानजी रुचि और रेनू ने सपरिवार पहुंचकर मेरे कामकाज में मानो चार चांद लगा दिये। भाभी-दाज्यू इस कार्यक्रम में विनीत थे, उनके सानिध्य में प्रेमा दीदी जो कुक्कू के पैदा होने के समय पर भी पहले ही पहुंच गयी थी, का विशेष प्यार मिला। उससे गले मिलते वक्त भावुक हो गया था और जीजा जी जिनका नाम मैंने अपने फोन में जीजाजी मिश्राजी करके सेव किया था, याद आ गये। मैंने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए उसके गाल थपथपाए और सप्रयास हंस दिया। इसी मौके पर मुझे पुष्पा दीदी की भी याद आयी। उसने ही मेरी शादी तय करवाई और उसी के घर से विवाह के सभी कार्यक्रम संपन्न हुए। कार्यक्रम में दाज्यू लोगों के संग मुझसे पहले ही पहुंचीं शीला दीदी और पूरन जीजा जी का स्नेह तो वर्णनातीत है। अधिकारपूर्वक उनसे कई आग्रह कर लेता हूं। मुझे समय-समय पर अच्छी सीख देते हैं और मदद करने में आगे बढ़कर रहते हैं। इन सबके बीच हमारी पूजनीय भाभी जी (हरीश की ईजा) और उनके संग प्रकाश एवं दोनों भाइयों का पूरा परिवार। साथ में भतीजा हेम और दीप तिवारी एवं उसका परिवार। इन सबके साथ इस विशेष पवित्र कार्यक्रम की शोभा बढ़ी मेरी सभी भतीजियों का प्रतिनिधित्व करने वाली निर्मला से। वह सपरिवार पहुंची और बेटे को आशीर्वाद दिया। दर्शन जी, दीपेश जी और कुलदीप जी के साथ भानजे गौरव को ब्राह्मण देवता स्वरूप सामने देखकर बहुत ही प्रसन्नता से मेरा काम संपन्न होता चला गया। जो लोग नहीं पहुंच पाए उन्होंने फोन पर बधाई दी। बड़ी दीदी विमला दीदी ने फोन पर खूब आशीर्वाद दिया और कुक्कू को बधाई दी। भतीजी कन्नू ने भी फोटो भेजते रहने के लिए कहा।

ससुराल पक्ष का वह अविस्मरणीय सहयोग

इस शुभ कार्य की तैयारी बहुत पहले से चल रही थी। इस तैयारी में मेरी पत्नी भावना के बड़े भाई यानी बच्चों के बड़े मामा नंदाबल्लभ जी की पत्नी आदरणीय भाभीजी, उनकी बिटिया नेहा, दूसरे भाई शेखर जोशी और उनकी पत्नी लवली भाभी का विशेष सहयोग रहा। साथ ही में भावना के जुड़वां भाई भास्कर जोशी (राजू), उनकी पत्नी प्रीति संग हम चंडीगढ़ में ही बातचीत करते और योजनाएं बनाते। राजू ने परिजनों के चाय-नाश्ते और लंच-डिनर की व्यवस्था में विशेष सहयोग किया। प्रीति यानी पिंकी तो प्रसन्न मुद्रा में सबके साथ घुलमिल कर उत्साह को दोगुना कर देती है। शेखरदा अक्सर तैयारी के बाबत पूछते रहते। लवली भाभी ने चंडीगढ़ आकर सुंदरकांड एवं श्री सत्यनारायण कथा संबंधी कार्यक्रम में खूब सहयोग किया। साढू भाई सुरेश पांडेय जी नहीं पहुंच पाए क्योंकि उनकी माताजी (जिन्हें मैं ईजा कहता हूं) इन दिनों बहुत ज्यादा अस्वस्थ हैं। लेकिन फोन पर उनसे बात होती रहती और हरिद्वार में कार्यक्रम संपन्न होते ही उनका बधाई संदेश एवं फोन आ गया। इन सबका सहयोग अविस्मरणीय है। धन्यवाद शब्द तो इसके लिए बहुत छोटा है। हां इनसे बच्चों के प्रति आशीर्वाद की दरकार हमेशा रहेगी ही। बच्चों के जिक्र में छोटे बेटे धवल, शेखरदा के बेटे सिद्धांत जोशी (सिद्धू) एवं राजू के बेटे भव्य का उत्साहजनक माहौल बनाए रखने एवं छोटे-छोटे, लेकिन थकाऊ काम को संपन्न कराने में विशेष सहयोग रहा। इन सबको ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद।


मां गंगा की दिव्य आरती और स्नान

हरिद्वार पहुंचे तो बिश्नोई धर्मशाला में भाभी-दाज्यू, शीलादी-जीजाजी पहुंचे हुए थे। कुछ ही देर में चंडीगढ़ से हम आठ लोग पहुंच गए। थोड़ी देर में काठगोदाम की टीम भी आ गयी। दोपहर बाद पंडित केवलानंद पांडेय जी भी मिलने आई। उन्होंने पूछा कि क्या गंगा आरती देखनी है, हम सबने उत्साहपूर्वक हां में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आरती तो साढ़े छह बजे होगी, लेकिन पहुंचना पड़ेगा पांच बजे। हम सब थके हुए थे। एकबारगी गंगा तट पर जाने का कार्यक्रम टालने का सा मन हो गया, लेकिन कुछ ही देर में मां गंगा का आशीर्वाद ऐसा असर कर गया कि बच्चों को छोड़कर (भव्य साथ गया) हम सब पहुंच गये। पंडित जी ने एकदम करीब ही बैठने की व्यवस्था कर दी। वह स्वयं गंगा आरती करवाने वालों में शामिल थे। पहले ही कह चुके थे कि पांच बजे बाद फोन नहीं उठा पाऊंगा। हम लोगों ने देश-विदेश से आए हजारों लोगों के साथ गंगा आरती में भाग लिया। प्रणाम किया और लौट आये। एक-एक चाय पीकर कमरों में गये और तब तक दो भानजियां सपरिवार पहुंच गयीं और कुछ देर बाद भतीजा प्रकाश भी सपरिवार वहां पहुंच गया। कुछ देर मुलाकात के बाद बाकी लोग कहीं अन्यत्र चले गये, उन्होंने अपने ठहरने की अलग व्यवस्था कर रखी थी। फिर चला मेहंदी का कार्यक्रम। गीत-संगीत। इसी बीच चर्चा हुई कि क्यों ने सुबह-सुबह गंगा स्नान किया जाये। साथ ही पंडित जी ने कहा था कि अगर सुबह की आरती देखनी हो तो भी आ सकते हैं। हम लोग रात करीब एक बजे सोये होंगे, लेकिन उत्साह ऐसा कि सुबह चार बजे उठ गये। करीब सवा पांच बजे हम लोग हर की पौड़ी पहुंच गये। वहां सबने स्नान किया और लौट आये।


और जनेऊ संस्कार, सुंदरकांड व श्रीसत्यनारायण कथा संपन्न

करीब दस बजे पंडित जी बिश्नोई धर्मशाला के पास ही भीमगोड़ा घाट पहुंच गये। कार्यक्रम शुरू हुआ। भाभी जी लोगों ने शकुनआखर और भगवत भक्ति के अन्य गीत गाये। इस बीच, सभी परिजन पहुंच गये। बीच-बीच में चाय का दौर चला और बूंदाबांदी भी हुई। बेहतरीन तरीके से कुक्कू का जनेऊ संस्कार संपन्न हो गया। रात करीब आठ बजे हम लोग चंडीगढ़ पहुंच गये। लखनऊ से आये दाज्यू-भाभी भी हमारे साथ ही आये। अन्य लोग भी यथासमय अपने-अपने घर पहुंच गये। सोमवार को थोड़ा आराम कर मंगलवार को हमने पहले सुंदरकांड का पाठ किया फिर श्री सत्यनारायण पाठ के लिए पंडित जोशी जी पहुंच गये। कुछ लोगों की भागीदारी में कार्य संपन्न हुआ। जीवन चलने का नाम और इसी चलने के नाम पर ही सभी अपने-अपने काम में लग गये हैं। ईश्वर सब पर अपना आशीर्वाद बनाये रखना। जय गंगा मैया। जय ग्वेल देवता। जय भगवती माता। जय ईजा। जय बंबई नाथ स्वामी। जय हो बिनसर महादेव। सर्वेभ्यो, देवेभ्यो नम: