केवल तिवारी
मंगलवार की सुबह एक फोन आया। दूसरी ओर से एक मैडम ने कहा कि HDFC Bank से बोल रही हूं। आपका अकाउंट हमारे यहां है। कोई issue तो नहीं है। मैंने बताया कि पिछले दिनों मैंने एक छोटी सी online payment की, उसके 28 रुपए चार्ज काट लिया। मैडम ने hold करने के लिए कहा और बताया कि आपने यानी मैंने net banking से नहीं, कार्ड से पेमेंट किया है। विश्वास के लिए इतना पर्याप्त था। इससे पहले भी जब फोन आया तो Truecaller और Airtel की तरफ से कोई अलर्ट मैसेज नहीं आया। खैर बात होने लगी। कुछ विश्वास जमने पर मैडम ने कहा कि मेरे लिए credit card offer है। लाइफ टाइम फ्री। हालांकि इस फ़्री में कितना सत्य होता है, यह किसी से छिपा नहीं। एक दिन पहले भी HDFC Bank से फोन आया था, इसी बात के लिए, मैंने मना कर दिया था। लेकिन इस वक्त पता नहीं क्या हुआ कि मैं बात करता रहा और OTP बता दिया। पहले account releted फिर आधार संबंधी। मैंने तमाम आशंकाएं जताई, लेकिन मैडम ने कहा कि आप पिन genrate करने से पहले Bank आ जाना। Satisfaction के बाद ही कार्ड का इस्तेमाल करना। इसी दौरान कार्ड apply का मैसेज आ गया। बात खत्म होने के बाद मैंने 10 बार account check किया। हम लोवर मिडिल क्लास के खाते में होता ही कितना है, लेकिन जितना भी होता है, सबकुछ होता है। मुझे याद आया अपने पुराने पड़ोसी जोगिंदर लाल जी वाला किस्सा। वह गांव गये थे। उनके पास फोन आया एक व्यक्ति का। उसने अपने आप को पंजाब नेशनल बैंक का कर्मचारी बताया और कहा कि आपने जो कार्ड के लिए अप्लाई किया है, वह बन गया है। सीनियर सिटीजंस को हम लोग घर जाकर कार्ड दे रहे हैं इसलिए आपके पास एक ओटीपी आएगा वह बता देना। जोगिंदर लाल जी ने कहा कि जो फोन बैंक से लिंक है वह तो मेरी पत्नी के पास है। वह चंडीगढ़ में है। मैं गांव आया हूं। उस व्यक्ति ने जोगिंदर लाल जी को बातों में लगाया और उनकी श पत्नी का नंबर ले लिया। थोड़ी देर में उनकी पत्नी के पास भी एक फोन आ गया। उनसे भी उसने वही ओटीपी वाली बात कही। जोगिंदर लाल जी की पत्नी मेरे पास आ गईं। बोलीं देखिए एक बैंक से फोन आया है यह ओटीपी मांग रहे हैं। आप जरा बता देना। मैंने उनका मोबाइल देखा उससे बात की और वहीं पर मेरी पत्नी भी खड़ी थी। मैंने उस कथित बैंक वाले व्यक्ति से कहा। भैया क्यों किसी को बेवकूफ बना रहे हो। किसी की गाढ़ी कमाई क्यों लूटने की कोशिश कर रहे हो। उसने मुझे इतनी गंदी-गंदी गालियां दीं कि मेरी पत्नी और व जोगिंदर लाल जी की पत्नी थी, इसलिए मैं कुछ बोल नहीं पाया। उसने फोन काट दिया। यानी पूरी तरह फ्रॉड था। अगर ओटीपी दे दिया होता तो शायद उनका अकाउंट खाली हो गया होता। आज वही घटना मुझे याद आ गई और अभी भी वही बार-बार में सिहर रहा हूं कि मैंने ऐसा कैसे कर दिया कि थोड़ी देर की बातचीत के बाद मैंने पहले बैंक का ओटीपी फिर अपने आधार का ओटीपी दे दिया। इससे पहले अनेक बार मेरे पास fraud call आ चुकी हैं। हर बार मैं सतर्क रहा। आज ऐसा कैसे हो गया। गनीमत है कि मेरी किस्मत अच्छी है कि वह फ्रॉड कॉल नहीं थी। सही कॉल थी। मैडम बैंक अधिकारी ही थीं। लेकिन मैं सभी को आगाह करूंगा कि कभी भी कृपया फोन पर ओटीपी ना बताएं बैंक वाले भी खुद ऐसा ही कहते हैं। कोई ऐसी बात हो तो आप ब्रांच जाएं। भविष्य के लिए खुद भी प्रण लेता हूं कि ऐसा कुछ होगा तो ब्रांच में जाऊंगा, लेकिन कभी फोन पर ओटीपी नहीं बताऊंगा। अब क्रेडिट कार्ड को कितना भुगतना होगा, यह तो भविष्य बताएगा। इस घटनाक्रम का मैंने office में मित्र नरेंद्र और सूरज से भी किया। उन लोगों ने भी आश्चर्य जताया। एक मित्र वीरेंद्र सिंह बोले, अभी बना लो, देखना कभी बंद नहीं कर पाओगे। बैंक वाले क्रेडिट कार्ड बंद करवाने पर नाकों चने चबवा देते हैं। जय हो।


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