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Wednesday, March 25, 2026

स्वागत है कीट तुम्हारा, मेरी क्यारी में बनाओ बसेरा...

केवल तिवारी

कुछ समय पहले की बात है, अपनी क्यारी में कुछ भी बोता था तो पौधा बनने के कुछ समय ही बाद ही ज्यादातर में एक सफेद किस्म का पदार्थ (फंगस) दिखता और धीरे-धीरे पहले उसकी पत्तियां चौपट होतीं फिर पौधा। किसी ने सुझाव दिया कीटनाशक यानी Pesticide डालो। मैं बाजार जाकर एक शीशी और स्प्रे खरीद लाया।  कुछ पौधों पर छिड़का भी, उसकी तीक्ष्ण गंध मुझे बहुत खराब लगी। मैंने गौर किया कि जब तक गंध का असर रहा, अक्सर वहां दिखने वाली रंग-बिरंगी तितलियां और पंछी भी गायब हो गये। मैंने उस स्प्रे को फेंक दिया। अपने शौक के मुताबिक कभी गेंदा merigold, कभी लाल रंग के 'फोर ओ क्लॉक' फूल को क्यारियों में लगा दिया। 


इसी बीच, कहीं से कसूरी मेथी और सामान्य मेथी बोने का सुझाव मिला। बीज भी मिल गए। मैंने बो दिए। साथ ही पालक भी लगा दिया। क्यारी में भिंडी और बैंगन पर तो ऐसा फंगस लगा कि एक भी पौधा न बढ़ पाया और न ही बच पाया। वही सफेद चिपचिपे से फंगस के कारण। इसी दौरान मैंने एक बागवानी एक्सपर्ट का दैनिक ट्रिब्यन चैनल के लिए इंटरव्यू किया। उस इंटरव्यू का लिंक एक-दो जानकारों को भेजा। इस पर चर्चा के दौरान एक सज्जन ने बताया कि उन्होंने एक बार कीट पतंगों को मारने का उपाय पूछा तो उन्हें किसी बागवानी एक्सपर्ट ने कहा, क्यों मारते हो। कीट-पतंगे हों या कोई भी जानवर, इंसानों से कम ही खाते हैं। मुझे उनकी बात भी जमी। फिर एक दिन देखा कि एक अन्य पौधे पर सफेद चिपचिपा पदार्थ फैल गया है। उस पर कुछ चीटिंयां भी रेंग रही हैं। लेकिन इस बीच मेथी और कसूरी मेथी खूब हुई। पालक भी उग आया। मैंने छोटी-छोटी क्यारियां बनाईं। उसमें कहीं फूल तो कहीं कुछ और लगा दिया। अभी पिछले दिनों सभी क्यारियों को साफ कर उनकी गुड़ाई कर रहा था तो मुझे छोटे-छोटे कीट नजर आये। याद आया कि बचपन में इनको हाथ में रखकर हम पास-फेल, पास-फेल कहते थे। पास कहने पर उड़ जाता तो हम मान लेते कि इस बार तो कक्षा पास कर लेंगे। मुझे ध्यान है चौथी-पांचवीं तक ऐसा करते थे। कभी-कभी तो देखते थे कि यह कीट पंखों को फड़फड़ा रहा है यानी लगभग उड़ने वाला है तभी हम पास-पास, पास-पास एकतरफा बोलने लगते थे ताकि फेल का विकल्प ही न रहे। आज उन हरकतों पर हंसी आती है। लेकिन इस कीट के बारे में जब पता किया तो वाकई यह पास है। गूगल सर्च में देखा तो पास-फेल इंसेक्ट भी इसके सर्च ऑप्शन search option में से एक है। लेडी बग lady bug भी कहते हैं। कहीं लिखा दिखा कि अगर यह कीट दिख जाए तो भूलकर भी कीटनाशक न डालें। पिछले दिनों जब में क्यारी खोद रहा था तो यह खूबसूरत कीट दिखा। एक नहीं, अनेक। छोटे बेटे धवल ने भी रुचि दिखाई। आश्चर्यमिश्रित जवाब, ये तो लेडी बग है। हां। फिर मैंने बचपन की कहानी सुनाई। एक कीट उसने भी हाथ पर रखा। फुर्र से पास ही में गेंदे के पौधे पर जा बैठी। फसल का नया सीजन आने वाला है। कुछ में भिंडी, कुछ में धनिया और अरबी बो दी है। देखते हैं ये लेडी बग कितना विस्तार दिखाती हैं। कुछ फूल के पौधों पर तो दिख रही रही हैं। स्वागत है इस रंग-बिरंगे कीट का। 








Sunday, March 15, 2026

दैनिक ट्रिब्यून और पंडित अनिरुद्ध जी

 केवल तिवारी






28 फरवरी, 2026 को दैनिक ट्रिब्यून प्रूफ सेक्शन से पंडित अनिरुद्ध शर्मा जी सेवानिवृत्त हो गये। उनके लिए एक गेट टू गेदर के लिए हम दैनिक ट्रिब्यून न्यूजरूम के लोग कुछ योजना बना ही रहे थे कि पता चला कि खुद पंडित जी ने 27 तारीख की शाम को चाय-पानी की व्यवस्था अपनी ओर से की है। जब उन्होंने खुद ही चाय-पानी की व्यवस्था की तो फिर क्या कहना था। यह तो विदाई संबंधी बात का समापन था। 


असल में बात की अब शुरुआत करता हूं उस वाकये से जो उन्होंने 27 फरवरी की रात करीब साढ़े दस बजे किया। असल में सेवानिवृत्ति के एक दिन पहले भी उन्होंने पूरी नौकरी की और साथ ही संपादक नरेश कौशल जी के सामने ही सभी टीम से कहा कि अब भी कभी मेरे लायक जरूरत पड़ी तो नि:शुल्क हाजिर रहूंगा। पंडित अनिरुद्ध जी को हम लोग ऑफिस के मुख्य गेट तक छोड़ने गये। उन्होंने गेट पर अंदर की ओर मुंह करके ट्रिब्यून जैसे महान संस्थान को दंडवत प्रणाम किया। इसके मुख्य दरवाजे पर शीश नवाया। मैं बात करूं पंडित जी के साथ अपने संबंधों की तो उनके साथ दो तरह से मिलना होता था। एक तो ऑफिस में हम साथ-साथ। इसके अलावा ट्रिब्यून स्कूल में उनकी बिटिया और मेरा बेटा एक ही क्लास में पढ़ते थे। अनेक बार पीटीएम में उनसे मुलाकात होती। इसके अलावा उनके बेटे का नाम कार्तिक और मेरे भी बेटे का नाम। वह जीरकपुर की तरफ से चंडीगढ़ के प्रवेश द्वार के करीब स्थित ट्रिब्यून सोसायटी कांप्लेक्स में पहले रहे। बाद में भी उसी घर के सामने दस साल मैं भी वहीं रहा। यानी उनकी बातें अक्सर होती रहतीं। जहां से भी सुनता, उनके बारे में यही कहा जाता कि वह धार्मिक व्यक्ति हैं। अच्छा संदेश देते हैं। बातों ही बातों में यहां बताना जरूरी समझता हूं कि एक दिन वह मुझे ऑफिस की कैंटीन में मिले और मुझसे कुछ बातें कहीं। साथ ही कहा कि आप खुलकर जीयें। बहुत परवाह क्यों करनी। मैं मान गया उनको। असल में, मेरी अजीब सी आदत है, छोटी-छोटी बातों को भी बहुत सोचता हूं। उनकी उस बात पर भी मैंने एक ब्लॉग लिखा था (https://ktkikanw-kanw.blogspot.com/2022/08/blog-post_19.html)खैर... पंडित जी की सहृदयता की चर्चा के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण बात है कि वह किसी की भलाई के लिए दो कदम आगे बढ़कर चलने वाले हैं। एक बार हमारे एक साथी पर संकट आ गया। साथी ही क्या, संस्थान पर ही संकट सा आ गया। उन्होंने कहीं इसके बारे में पूछा (पूछा से तात्पर्य है धार्मिक स्थिति से एक ऐसे व्यक्ति से पूछताछ जो सच्चे मन से कुछ करने के लिए कहते हैं)। अनिरुद्ध जी का मेरे पास फोन आया। कहा, 'एक उपाय है, करके देख लेते हैं, लेकिन 11 बजे तक अनवरत आना पड़ेगा। खान-पान सात्विक करना होगा।' मैंने तुरंत हामी भर दी। उसके बाद हम दो-चार लोग 11 दिनों तक विशेष पूजा में सुबह करीब दो घंटे लगाते। अंतिम दिन हम लोगों ने पारायण किया। हनुमान ध्वज लगाया। ईश्वर की कृपा और पंडित जी की शुभकामना रही कि तात्कालिक संकट टल गया। इसके बाद हम पंडित जी के गांव भी गये। उन व्यक्ति से भी मिले जिन्होंने यह उपाय बताया था। ऐसे अनेक किस्से हैं जब बातों-बातों में पंडित अनिरुद्ध जी का जिक्र आ जाता है। एक बार उन्होंने गुरुवानंद जी के किसी कार्यक्रम में बुलाया। डीएवी स्कूल में। उसके बाद एक अन्य कार्यक्रम में जो कलाग्राम में हुआ थ। अब अनेक लोग मिलते हैं तो आपस में जय गुरुदेव कहते हैं। अनेक लोगों की गलत आदतों को उन्होंने छुड़वा दिया। एक बार पंडित जी ने गृह प्रवेश में डेराबस्सी बुलाया। वहां भी अनेक लोग मिले। अभी हाल ही में, गत 11 मार्च को पंडित जी के सुपुत्र कार्तिक के विवाह समारोह में जाना हुआ तो वहां अनेक पुराने जानकार मिले। चर्चाएं हुईं। अच्छा लगा। पंडित जी बेशक ऑफिस से सेवानिवृत्त हुए हैं, लेकिन उनसे सलाह मशविरा जारी रहेगा। कुछ काम भी हैं जो उनसे मिलकर पूरे होंगे। पंडित आप स्वस्थ रहें यही कामना है। ईश्वर की, गुरुदेव की कृपा आप पर बनी रहे। 

Thursday, March 12, 2026

16 बरस का धवल, नये संकल्प, नयी उड़ान

केवल तिवारी

इस ब्लॉग या विशेष चिट्ठी को दो दिन पहले यानी 10 मार्च को ही लिख देना चाहिए था क्योंकि मेरे छोटे बेटे धवल का जन्मदिन मंगलवार 10 मार्च को था। इस बार वह 16 साल का हो गया। सुबह पारंपरिक पूजा-पाठ संपन्न कराने के बाद शाम को मैं ऑफिस से कुछ देर के लिए गया। केक कटिंग सेरेमनी में शामिल हुआ। उसके मामा भास्कर (राजू), मामी और उनका बेटा भव्य भी मौजूद रहे। मैं तो तुरंत वापस ऑफिस आ गया, लेकिन बाकी लोग रात 10 बजे तक बातचीत और खान-पान में व्यस्त रहे। उसके अगले दिन यानी बुधवार को भी कुछ व्यस्तताएं रहीं। शाम को एक विवाह समारोह में भी शामिल हुए। आते वक्त गाड़ी पंक्चर, फिर धवल का उस संकट से उबरने में मदद, आदि-आदि से लगा कि बच्चा अब बड़ा हो गया है। 10 और 11 मार्च ऐसे ही निकल गये। आज 12 मार्च को कुछ लिखने का मौका मिला है। खैर... यह तो है छोटा सा विवरण बर्थडे सेलेब्रेशन के दिन का और उसके बाद की व्यस्तताएं।



अब मुख्य बात, धवल ने इस बार 10वीं की बोर्ड परीक्षा दी है। खूब मेहनत करने के बाद। अगर कोई बच्चा मेहनत करता हुआ दिखता है तो फिर परिणाम के लिए बहुत परेशान नहीं होना चाहिए। बतौर अभिभावक मैं बड़े बेटे कार्तिक को भी समझाता था कि तुम मेहनत कर रहे हो, बाकी सब अच्छा ही होगा। यही बात धवल को भी बताता हूं। धवल यह बात तुमसे विशेष तौर पर कि खूब मेहनत करो। परेशानी को हावी मत होने देना। हम जो बातें अक्सर बताते हैं, गाहे-ब-गाहे उन्हीं बातों को कभी स्कूल में तो कभी मोटिवेशनल लेक्चर में बताया जाता है। हां यह जरूर होता है कि 'घर की मुर्गी दाल बराबर', हालांकि जब कभी मैं कोई पुरानी बात दोबारा या तिबारा बताता हूं तो तुम याद करते हो कि पापा ये आप बता चुके हो। धवल अब तुम्हारे सामने दो साल की कड़ी परीक्षा है, इसके लिए तुम मानसिक तौर पर तैयार भी हो। तुम हम लोगों से खुद ही कहते हो कि मुझे लगे रहने दो। ध्यान रखना। इन दिनों तुम्हारा एलर्जिक ट्रीटमेंट चल रहा है। उसका तो इलाज हो जाएगा, लेकिन कुछ आदतों पर सुधार की आवश्यकता है। वैसे समय के साथ अवश्यंभावी बदलाव आ ही जाता है। लिखने को हजारों बातें हैं, लेकिन अभी यह छोटी सी ही चिट्ठी, बाकी बातें चलती रहेंगी। ईश्वर और हमारे पूर्वजों, बुजुर्गों का आशीर्वाद तुम पर बना रहे। हमेशा खु