केवल तिवारी
इस ब्लॉग या विशेष चिट्ठी को दो दिन पहले यानी 10 मार्च को ही लिख देना चाहिए था क्योंकि मेरे छोटे बेटे धवल का जन्मदिन मंगलवार 10 मार्च को था। इस बार वह 16 साल का हो गया। सुबह पारंपरिक पूजा-पाठ संपन्न कराने के बाद शाम को मैं ऑफिस से कुछ देर के लिए गया। केक कटिंग सेरेमनी में शामिल हुआ। उसके मामा भास्कर (राजू), मामी और उनका बेटा भव्य भी मौजूद रहे। मैं तो तुरंत वापस ऑफिस आ गया, लेकिन बाकी लोग रात 10 बजे तक बातचीत और खान-पान में व्यस्त रहे। उसके अगले दिन यानी बुधवार को भी कुछ व्यस्तताएं रहीं। शाम को एक विवाह समारोह में भी शामिल हुए। आते वक्त गाड़ी पंक्चर, फिर धवल का उस संकट से उबरने में मदद, आदि-आदि से लगा कि बच्चा अब बड़ा हो गया है। 10 और 11 मार्च ऐसे ही निकल गये। आज 12 मार्च को कुछ लिखने का मौका मिला है। खैर... यह तो है छोटा सा विवरण बर्थडे सेलेब्रेशन के दिन का और उसके बाद की व्यस्तताएं।
अब मुख्य बात, धवल ने इस बार 10वीं की बोर्ड परीक्षा दी है। खूब मेहनत करने के बाद। अगर कोई बच्चा मेहनत करता हुआ दिखता है तो फिर परिणाम के लिए बहुत परेशान नहीं होना चाहिए। बतौर अभिभावक मैं बड़े बेटे कार्तिक को भी समझाता था कि तुम मेहनत कर रहे हो, बाकी सब अच्छा ही होगा। यही बात धवल को भी बताता हूं। धवल यह बात तुमसे विशेष तौर पर कि खूब मेहनत करो। परेशानी को हावी मत होने देना। हम जो बातें अक्सर बताते हैं, गाहे-ब-गाहे उन्हीं बातों को कभी स्कूल में तो कभी मोटिवेशनल लेक्चर में बताया जाता है। हां यह जरूर होता है कि 'घर की मुर्गी दाल बराबर', हालांकि जब कभी मैं कोई पुरानी बात दोबारा या तिबारा बताता हूं तो तुम याद करते हो कि पापा ये आप बता चुके हो। धवल अब तुम्हारे सामने दो साल की कड़ी परीक्षा है, इसके लिए तुम मानसिक तौर पर तैयार भी हो। तुम हम लोगों से खुद ही कहते हो कि मुझे लगे रहने दो। ध्यान रखना। इन दिनों तुम्हारा एलर्जिक ट्रीटमेंट चल रहा है। उसका तो इलाज हो जाएगा, लेकिन कुछ आदतों पर सुधार की आवश्यकता है। वैसे समय के साथ अवश्यंभावी बदलाव आ ही जाता है। लिखने को हजारों बातें हैं, लेकिन अभी यह छोटी सी ही चिट्ठी, बाकी बातें चलती रहेंगी। ईश्वर और हमारे पूर्वजों, बुजुर्गों का आशीर्वाद तुम पर बना रहे। हमेशा खु


