Tuesday, August 17, 2010

हिंदी के खिलाफ साजिश

हिन्दी के बारे में
पिछले दिनों हिन्दी के एक बड़े अखबार वाले से भाषा को लेकर कुछ बहस हुई। उन साहिबान का कहना था कि हिन्दी के अखबारों को अधिक से अधिक अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। मैं इसे बिल्कुल गलत मानता हूं। मेरा कहना है कि हिन्दी भाषा के साथ-साथ किसी भी अन्य भाषा का ज्ञान होना चाहिए। खूब होना चाहिए, लेकिन बोलचाल की भाषा का बहाना बनाकर अंग्रेजी शब्दों को ठंूसना सरासर गलत है।
हिन्दी बोलने-लिखने के साथ यह तर्क विशुद्ध रूप से गढ़ा गया है कि बोलचान की भाषा में दिक्कत होती है। अंग्रेजी के कई शब्दों को समझने के लिए, अर्थ ढूंढ़ने के लिए और उसके उच्चारण को समझने के लिए हम न जाने कितनी बार शब्दकोश का सहारा लेते हैं। जरा सोचिए कि हिन्दी के बीच में तमाम अंग्रेजी शब्दों को घुसेड़ने में भी क्या खासी दिक्कत नहीं हुई होगी। फिर उन्हें जबरन लोगों से बुलवाया गया होगा। कौन नहीं समझता उप निरीक्षक (सब इंस्पेक्टर), छात्र (स्टूडेंट), जौहरी (ज्वेलर), हत्या (मर्डर), विशेष (स्पेशल), मुठभेड़ (एनकाउंटर)...वगैरह-वगैरह। ऐसे अनगिनत शब्द हैं जो हिन्दी में अच्छे-खासे प्रचलित हैं, खूब बोले जाते हैं, लेकिन न जाने क्यों साजिशन महज यह कहकर कि आम बोलचाल की भाषा है उन शब्दों को खत्म किया जाता है। निवेश को इनवेस्ट कहना या लिखना, पर्वतीय इलाके को हिल एरिया, खूबसूरत को ब्यूटीफुल, नख-शिख को टॉप टू बॉटम कहना या लिखना एक साजिश नहीं तो क्या है।
हिन्दी के प्रयोग को लेकर इस लेख का यह अर्थ कतई नहीं कि अन्य भाषा को दरकिनार कर दिया जाए। हर भाषा की अपनी गरिमा है। फिर हिन्दी की समृद्धता को लेकर तो किसी भी प्रकार का किंतु या परंतु है ही नहीं। आप लिखने-पढ़ने का कुछ काम हिन्दी में में कर रहे हैं तो उस भाषा के साथ पूरी तरह से ईमानदारी बरती जानी चाहिए। दिमाग पर ज्यादा जोर देने के बजाय आप कहीं पर भी कोई शब्द, खासतौर पर अंग्रेजी का शब्द चला देते हैं तो यह चलताऊपन खोखले दिमाग का परिचायक है। आप सोेचिए थोड़ा जोर डालिए, आपकी मेहनत उस कार्य में खूबसूरती ही लाएगी। पोस्टमैन को डाकिया लिख देंगे तो वह गलत नहीं हो जाएगा। इंडिविजुअल को व्यक्तिगत लिख देंगे तो गलत नहीं होगा। क्या हर्ज होगा यदि आप सोशल को सामाजिक, डिस्टेंस को दूरस्थ, कैंपस को परिसर और ग्रीनरी को हरियाली लिख लेंगे तो। हिन्दी भाषा के महत्व को समझिए, इसकी इस खूबसूरती को तो समझिए ही कि जैसा लिखेंगे वैसा ही बोलेंगे। साइकोलोजी जैसे शब्द का आपको भ्रम नहीं होगा, सीन जैसा कोई शब्द भ्रामक नहीं रहेगा।
केवल तिवारी

4 comments:

Rajeev Bharol said...

बिलकुल सहमत हूँ.
जहाँ हिंदी का शब्द न मिले या बहुत मुश्किल हो वाहन तो अंग्रेज़ी का शब्द ठीक है. अन्यथा हिंदी के शब्द ही प्रयोग किये जाने चाहियें..

दुःख तो इस बात का है की कई बार समाचार दिखाने वाले चैनल अशुद्ध हिंदी का प्रयोग करते हैं.

अनुनाद सिंह said...

जिस महानुभाव का आप संकेत कर रहे हैं उनके बारे में छानबीन होनी चाहिये। उन्हें हिन्दी का हितैषी मान लेना खतरनाक हो सकता है। कहीँ उनके मन में हिन्दी के प्रति पुराना कोई विद्वेष तो नहीं है जिसे समय देखकर उन्होने उगल दिया?

कामरूप 'काम' said...

नमस्कार,

हिन्दी ब्लॉगिंग के पास आज सब कुछ है, केवल एक कमी है, Erotica (काम साहित्य) का कोई ब्लॉग नहीं है, अपनी सीमित योग्यता से इस कमी को दूर करने का क्षुद्र प्रयास किया है मैंने, अपने ब्लॉग बस काम ही काम... Erotica in Hindi. के माध्यम से।

समय मिले और मूड करे तो अवश्य देखियेगा:-

टिल्लू की मम्मी

टिल्लू की मम्मी -२

सुधीर said...

सही दिशा में बहस। इसे आगे बढ़ाइये।