Sunday, February 26, 2017

हरियाणा घूमने की शुरुआत एक विवाह समारोह से

सेल्फी पूरी नहीं आ पायी। अनाड़ी
हुक्का गुड़गुड़ाते ताऊ
पिछले शुक्रवार शाम कुछ खबरें निपटाने के बाद कुछ खबरों की ही चर्चा में मशगूल थे कि दीपक जी (दैनिक ट्रिब्यून आने के बाद मेरे उन साथियों में शुमार जिनसे जल्दी करीबियत बनी) ने कहा, 'कल एक शादी में जाना है चलेंगे।' बिना यह सवाल किए कि कहां, कैसे? पूछे, मैंने कह दिया, 'हां चलिये।' कितने बजे निकलना होगा? सुबह 8 से 8:30 के बीच। शाम तक पहुंच जाएंगे ना? ड्यूटी भी करनी है? हां-हां, मुझे भी आना है। जाना तय हो गया। अपने संकोची स्वभाव के मुताबिक फिर एक सवाल पूछा, आपके साथ और कौन-कौन हैं? दीपक जी ने कहा, 'कोई नहीं?' मैं मन से तैयार हो गया। असल में मुझे लगा, ऐसा न हो कि दीपक जी सपिरवार जा रहे हों और मुझसे ऐसे ही पूछ लिया और मैंने हां भी कर ली। खैर... अपने पूरे यात्रा विवरण की भूमिका के लिए यह लिखना जरूरी था।
हम लोग सुबह 8 बजे के करीब एयरपोर्ट चौक रायपुर खुर्द लालबत्ती के पास मिले और शुरू हो गया सफर। असल में हमें जाना था कुरुक्षेत्र से आगे, कैथल के पास बटेठी गांव। मुझ कुछ चीजों का अलग अनुभव हुआ, जिसके लिए मैं अपने ब्लॉग में उन्हें साझा करने को आतुर हो गया। एक तो दीपक जी ने सुनाया फोटो वाला किस्सा। किस्सा कुछ यूं था कि जिस 'जीत्ते' (दीपक जी लोग इसी नाम से पुकार रहे थे) के बेटे और बेटी की शादी में हम लोग जा रहे थे उनकी शादी के दौरान फोटोग्राफी का चलन नहीं था। लेकिन मिस्टर जीत्ते की इच्छा हुई कि फोटोग्राफर को बुलाया जाए। जिम्मेदारी दीपक जी को दी गयी। इन्होंने एक फोटोग्राफर को बुक कर दिया। लेकिन वह बटेढी और बटेठी गांव में अंतर नहीं कर पाया और दूसरी जगह पहुंच गया। दोनों गांवों के बीच तकरीबन 15 किलोमीटर का फर्क होगा। खैर किसी तरह वह फोटोग्राफर थकाहारा शादी में पहुंचा। फेरे चल रहे रहे थे। उसने फटाफट कैमरा तैयार किया और क्लिक करने लगा। तभी कुछ लोग आये और उसे पीटते हुए बाहर लाये। तब पता चला कि फोटो तो खींच ही नहीं सकते। पूरा माजरा सबके सामने स्पष्ट होने से पहले वह बेचारा पिट चुका था। अब समय बदल गया। इस दिन जब हम वहां पहुंचे तो जगह-जगह फोटो खिंचवाने के लिए लोग समूह में खड़े हो रहे थे।
एक बात मुझे वहां पहुंचकर अच्छी लगी कि किसी ने भी यह अहसास नहीं होने दिया कि मैं 'बिन बुलाया मेहमान हूं।' अनजान भी दुआ-सलाम करते रहे। एक जगह तो मैं कुछ देर अकेला बैठा रहा (असल में दीपक जी की कार के पीछे एक और कार खड़ी हो गयी, जब चलने लगे तो उनका पता नहीं था, उसी को ढूंढने दीपकजी चले गये) वहां दो-चार बुजुर्ग आये। सबने राम-राम की। हालचाल लिया। कई बातें होने के बाद यह पूछताछ हुई कि मैं कौन हूं? उसके बाद एक बुजुर्ग हुक्का भरकर लाये और मेरी तरफ खिसका दिया। मैं मुस्कुरा दिया। मैंने कहा, 'हुक्का आप पीयो मैं आपकी फोटो खींचता हूं।' वैसे पहले वाले किस्से के बाद मैं थोड़ा घबरा रहा था, लेकिन 'ताऊ' तुरंत फोटो खिंचवाने को तैयार हो गये और उन्होंने कैमरे की तरफ देखते ही गुड़गुड़ शुरू कर दी।
इससे पहले एक और वाकया हुआ, जिसका जिक्र करना चाहता हूं। कुछ बुजुर्ग हमारे साथ बैठे थे। मैं और दीपक जी अपने कुछ दोस्तों के बारे में बात कर रहे थे। ऐसे दोस्त जो 'प्रयोगधर्मी' बहुत हैं। कुछ उसमें से सफल नहीं हो पाये। तभी बुजुर्ग महोदय बोले, 'पूरा बाणिया बणणा पड़ै सै तब जाकर बिजनेस हुआ करै।' मैंने उनकी बात से इत्तेफाक जताते हुए सिर हिलाया। फिर उन्होंने अपनी बात बतायी कि उनके पास 35 भैंसे हैं। अच्छा धंधा चल रहा है। उन्होंने कहा कुछ झोटे (भैंसा) हैं। एक नाम 'आसाराम' है। हम मुस्कुराये बिना रह नहीं पाये।
हरियाणा की सदाबहार मिठाई को कैसे नजरअंदाज कर दें। जिस शादी में हम लोग गये थे वहां अन्य चीजों के अलावा सबसे बड़ा स्टॉल मिठाई का था। मजे की बात यह थी कि लोग मिठाई भी भोजन की तरह थाली में परोसकर ले रहे थे। मुझे इस मौके पर हरियाणा के मिठाई के कई किस्से याद आए। एक वह भी कि एक जगह एक हरियाणवी बहुत देरी से पहुंचे। खाना खत्म हो चुका था। मिठाई भी। किसी बुजुर्ग ने सलाह दी कि चीनी पीसकर (खांड) उसमें घी मिलाकर फटाफट लड्डू बना दो। लड्डू तैयार कर ताऊ को दिये गये। पूछा गया मिठाई कैसी थी, वह सज्जन बोले, 'सब ठीक था बस थोड़ा मीट्ठा कम रह गया।'
एक दुखद वाकया भी हुआ। जिस शादी में हम गये वहां कोई धूम-धड़ाका नहीं था। पता लगा ढाई लाख में बुक किया गया डीजे कैंसल कराया गया। इसकी वजह थी शादी की पिछली रात पास के ही एक युवक का सड़क हादसे में मारा जाना। लोग उस वाकये को लेकर दुखी भी थे। सड़क हादसों पर कब नियंत्रण लगेगा। कभी हमारी गलती से होते हैं, कभी दूसरों की और कभी सड़क निर्माण की गलतियों की वजह से। लापरवाही का कॉकटेल अक्सर जानलेवा हो जाती है।

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