केवल तिवारी
उन्हीं की बातें, उन्हीं की परछाई
उस भीड़ में वह नजर नहीं आई।
इस बार कोटाबाग का दौरा
उन्हीं के कारण
यहां, वहां और हर जगह
हर कोई मिला, उन्हीं की वजह
ईजा ऐसा कहती थीं, वैसा करती थीं
हर किसी से अपनत्व से मिलती थीं
संघर्षों की प्रतिमूर्ति
सकारात्मक सोच
और निराशा से पूरा संकोच
मेरी निगाहें भी उन्हें तलाश रही थीं
वह ईजा कहां नजर आनी थीं
एक तस्वीर एकटक देख रही थी
मानो कह रही थी
ये दुनिया आनी-जानी
कुछ अनजानी, कुछ पहचानी
चलते रहो अपने पथ
बड़ों का सम्मान
छोटों को प्यार
इसी को बना लो
जीवन आधार
अब ईजा की तस्वीर ही थी
वह तो उस जहां में चली गई थीं
जहां से न आएगा कोई संदेश
उनकी बातें, उनकी यादें
अब तो रह गयीं शेष
पीपल को दिया पानी
ईजा को श्रद्धांजलि
पत्नी की दीदी की सास
साढू भाई की माताजी
अपनत्व हम भी उनमें पाते
मिलते-जुलते, हंसते-गाते
उस जहां में खुश रहना ईजा
आशीर्वाद अपना बनाए रखना ईजा
दिल से करता हूं नमन
सब पर कृपा बनाना ईजा।







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