केवल तिवारी
न्यू मीडिया के उभरते दौर में पत्रकारिता की पढ़ाई के तरीके में बदलाव की दरकार महसूस की जा रही है। इस बात से अधिसंख्य इत्तेफाक रखते हैं कि पत्रकारिता की मूल भावना कभी बदल नहीं सकती, लेकिन इसे समझने और समझाने का तरीका बदल सकता है। यह भी हो सकता है कि सीधे लेक्चर देने, नोट्स तैयार कराने के बजाय चर्चा-परिचर्चा के तौर पर इसे किया जाये। यानी विचारों का आदान-प्रदान हो। असल में पत्रकारिता संबंधी कई मुद्दों पर पिछले दिनों चर्चा हुई। मौका था विश्व संवाद केंद्र की ओर से पंचकूला में विवेकानंद जयंती के मौके पर आयोजित 'राष्ट्र निर्माण में नागरिक पत्रकारिता की भूमिका' विषय पर आयोजित कार्यशाला का। मुझे भी कुछ बोलने का मौका मिला। मैं पहुंचा था तो खचाखच भरे हॉल में कुछ वरिष्ठ कुछ बच्चे बैठे थे। कुछ की निगाहें आपस में टकरा रही थीं, कुछ की मेरी ओर भी थी। इसीलिए मैंने शुरुआत ही कर दी बिहारी की दो पंक्तियों से, 'कहत, नटत, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात। भरे भौन मैं करत हैं, भौंवन ही सो बात॥' खैर पहले कहा गया था कि मुझे मोबाइल पत्रकारिता पर कुछ बोलना है। विषय थोड़ा विस्तारित और तकनीक संबंधी था, फिर भी मैंने MoJo Journalism पर कुछ तैयारी की। बाद में कार्यक्रम के मुख्य आयोजक उत्तर क्षेत्र के प्रचार प्रमुख अनिल कुमार जी ने कहा कि चूंकि आप ब्लॉग लिखते हैं, इसलिए कटेंट राइटिंग पर फोकस्ड रहिए। मुझे मन मांगी मुराद मिली। सभागार में पहुंचा तो वहां वरिष्ठ पत्रकार एवं दैनिक ट्रिब्यून में समाचार संपादक रहे हरेश वाशिष्ठ जी, राजेश शांडिल्य जी आदि अनेक लोग मिले। बाद में द ट्रिब्यून के वरिष्ठ पत्रकार साई वैद्यनाथन भी आ गए। मैंने पत्रकारिता की मूल भावना का जिक्र किया कि जो जैसा है, उसे सही और कोट के साथ परोसिये। कोशिश रहनी चाहिए कि आप जज न बनें। कुछ स्टूडेंट्स ने कहा कि समस्या यह है कि पत्रकारिता पढ़ाने वाले आते हैं, लेक्चर देते हैं और चले जाते हैं। मेरी इस बात पर ज्यादातर लोगों ने इत्तेफाकी रखी कि कटेंट की महानता कभी खत्म नहीं हो सकती। लाख एआई का जमाना आ जाये, जो मूल कटेंट है, वह जितना शानदार होगा, वही चमकेगा। आज के युग में हर व्यक्ति पत्रकार है। सबके हाथों में मोबाइल है। मैंने जोर देकर कहा कि जब आप कोई चीज सार्वजनिक करते हैं तो आपको जिम्मेदार नागरिक बनना चाहिए। सोमालिया की वीडियो को लोग पंचकूला या चंडीगढ़ की बताने लगते हैं। कभी भी फॉरवर्ड में जल्दबाजी न करें। अपने कंटेंट में दम रखें। बातें और भी कई हुईं, समयाभाव के कारण चर्चा कम हुई, लेकिन सार्थक हुई।
वह भाषायी दिक्कत और हीन भावना
मेरी बात खत्म होते-होते एक विद्यार्थी ने कहा, सर अंग्रेजी हम बोल नहीं पाते, हिंदी हमसे लिखी नहीं जाती। उसकी बात पर सब हंस पड़े। मैंने कहा, अपनी कमी को ही अपनी ताकत बनाओ। मैंने याद दिलाया कि अपनी बात की शुरुआत में मैंने कैसे अपने पर ही एक मजाक बनाया। असल में, अपने ऑफिस में कई बार कहता हूं मैं कोई राजनीतिक पार्टी ज्वाइन कर लेता हूं। समय-समय पर खबर छपवा दिया करूंगा, केवल का कद बढ़ा। असल में हाइट को लेकर लंबे समय तक मैं भी हीन भावना से ग्रस्त रहा। मैंने उस युवक से कहा कि आजकल देसज बोली में वीडियो सुपर हिट चल रहे हैं। देसज बोली में बुलेटिन का जमाना है। खुद से प्यार कीजिए। सीखने की ललक रखिए और आगे बढ़िये। मुझे खुशी है कि वह मेरी बात से सहमत हो गया। यह तो कार्यशाला में मेरा अनुभव था अब उस कार्यक्रम की जो खबर चली उसे देखिए...
-----------
उस कार्यक्रम की जो खबर बनी और चली, उसे हूबहू चला रहा हूं
अच्छे कंटेंट के लिए सही माध्यम का चयन आवश्यकःअनिल कुमार
-नागरिक पत्रकारिता लोकतंत्र की रीढ़ःहरेश वरिष्ठ
-पर्यावरण से जुड़े विषयों को उठाने के लिए आज अनेक तकनीकी साधन उपलब्धःसाईं वैद्यनाथन
-व्यूज, लाइक और शेयर की रेस से बाहर निकलेंः पंकज पम्मू
-सूचना नहीं, सच्चाई की कमी है पत्रकारिता की असली चुनौतीःराजेश शांडिल्य
-विश्व संवाद केंद्र की कार्यशाला में पांच राज्यों के युवाओं की सहभागिता
पंचकूला। विश्व संवाद केंद्र द्वारा स्वामी विवेकानंद जयंती के उपलक्ष्य में नागरिक पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला का विषय “राष्ट्र निर्माण में नागरिक पत्रकारिता की भूमिका” रहा। पंचकूला सेक्टर चार माधव कुंज के कांफ्रेंस हाल में आयोजित कार्यक्रम में युवाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि पत्रकारिता अब केवल पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व के रूप में उभर रही है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उत्तर क्षेत्र के प्रचार प्रमुख अनिल कुमार ने कहा कि अच्छा और प्रभावी कंटेंट स्वतः नहीं मिलता, इसके लिए सही माध्यमों का चयन आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कंटेंट लेखन में केवल सूचना नहीं, बल्कि उसका संदेश, दृष्टिकोण और सामाजिक प्रभाव महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने एक्सपोज करने वाले कंटेंट, आख्यान निर्माण (नैरेटिव बिल्डिंग) और तथ्यों को प्रस्तुत करने के तरीके पर उदाहरणों सहित बताया कि कैसे एक ही तथ्य अलग प्रस्तुति में अलग प्रभाव पैदा करता है।
अनिल कुमार ने स्वामी विवेकानंद के आदर्श विचारों का उल्लेख करते हुए जातिगत भेदभाव के उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण, परिवार प्रबोधन और “स्व” के भाव पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने भाषा, भूषा, भोजन और भ्रमण में स्वदेशी और आत्मबोध की भावना को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यशाला मॉड्यूल-वन का हिस्सा है, जिसके बाद मॉड्यूल-टू और मॉड्यूल-थ्री आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने नागरिक कर्तव्यों को समझने और उन्हें पत्रकारिता के माध्यम से समाज तक पहुंचाने पर जोर दिया।
दैनिक ट्रिब्यून के पूर्व समाचार संपादक हरेश वशिष्ठ ने कहा कि नागरिक पत्रकारिता लोकतंत्र की रीढ़ है। भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत नागरिक पत्रकारिता आज लोकतंत्र के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रही है। तकनीक के विकास के साथ पत्रकारिता आम नागरिक के हाथों तक पहुंच चुकी है और अब यह बड़े मीडिया घरानों की चारदीवारी तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी, स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार, विकास की अनदेखी जैसे मुद्दों पर नागरिक पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, क्योंकि कई बार परंपरागत मीडिया इन मुद्दों तक पहुंच नहीं पाता या उन्हें पर्याप्त स्थान नहीं देता।
द ट्रिब्यून के मुख्य उप संपादक एवं साहित्यकार पी. साईं वैद्यनाथन ने पर्यावरण परिवर्तन के विषय पर युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली सनातन धर्म की मूल शिक्षा है। सनातन परंपरा में प्रकृति संरक्षण के अनेक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि नागरिक पत्रकारिता में पर्यावरण से जुड़े विषयों को उठाने के लिए आज अनेक तकनीकी साधन उपलब्ध हैं। इसके बाद सनातन धर्म और पर्यावरण पर आधारित एक रुचिकर प्रश्नोत्तर सत्र भी हुआ।
विख्यात आरजे एवं कथाकार पंकज पम्मू ने कहा कि आज मोबाइल फोन के चलते हर व्यक्ति खुद को पत्रकार समझने लगा है, लेकिन स्मार्ट सिटीजन होने के नाते यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हम जो भी कंटेंट लिखें, रिकॉर्ड करें या साझा करें, वह जिम्मेदारी के साथ हो। उन्होंने युवाओं से व्यूज, लाइक और शेयर की रेस से बाहर निकलने का आह्वान करते हुए कहा कि बेहतर और सार्थक कंटेंट को देर-सवेर समाज की स्वीकृति अवश्य मिलती है।
विश्व संवाद केंद्र हरियाणा के संपादक राजेश शांडिल्य ने कहा कि नागरिक पत्रकारिता केवल मोबाइल उठाकर खबरें परोसने तक सीमित नहीं, सच्चाई से जिम्मेदारी उठाने का काम है। आज सूचना की नहीं, बल्कि सच्चाई से पत्रकारिता करने वालों की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। निडरता, सत्यनिष्ठा और दायित्वबोध के बिना खबर समाज को दिशा नहीं, केवल शोर पैदा करेगी। पत्रकारिता का उद्देश्य राष्ट्रहित के मुद्दे सामने लाना और समाज के समक्ष सच लाना होना चाहिए। ऐसी जिम्मेदार पत्रकारिता ही समाज में विश्वास कायम कर बेहतर और जागरूक समाज के निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकती है।
कार्यशाला संयोजक एवं चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी पत्रकारिता विभाग के एसोसिएट प्रो. डा.विनोद सोनी ने कार्यक्रम आए हुए अतिथियों का आभार जताने के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करने के इच्छुक विद्यार्थियों के स्वर्णिम भविष्य की कामना की।इस अवसर विश्व संवाद केंद्र सचिव राजेश कुमार,पत्रकारिता विभाग के सहायक डा.तपेश किरण,चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डा.रंजन वालिया, महाराजा अग्रसेन यूनिवर्सिटी बद्दी (हिमाचल) के सहायक प्रो.डा.रवि मिश्रा कार्यशाला में प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की और नागरिक पत्रकारिता को समाज व राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनाने का संकल्प लिया।कार्यक्रम के समापन सत्र में कार्यशाला के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण किये गये।



1 comment:
बहुत विस्तार से लिख दिया। शानदार। जरूरत है युवाओं को समझने की। यही विवेकानंद जी की राय थी। बधाई
Post a Comment