केवल तिवारी
इरादे नेक हों तो सपने भी साकार होते हैं। अगर सच्ची लगन हो तो रास्ते आसां होते हैं।
गत बुधवार (15 अप्रैल 2026) को छोटे बेटे धवल (Dhawal Tiwari) और उसके साथ पढ़ रहे मामा के बेटे भव्य जोशी (Bhavya Joshi) का दसवीं बोर्ड परीक्षा (CBSE 10th Board Result) का परिणाम आया। भव्य के कारण दोहरी खुशी का विवरण इसी ब्लॉग में आगे आएगा। अभी पहले दूसरा विवरण।
रिजल्ट के वक्त मैं आफिस में था। पत्नी घर पर, बड़ा बेटा एक दिन पहले ही बेंगलुरु पहुंचा था। जिस बच्चे का रिजल्ट आया वह कोचिंग यानी फिजिक्स वाला (Physics Wallah) PW गया था। परिवार के ग्रूप में उसने ही मैसेज किया कि रिजल्ट आ गया। इस बार भी ठीक वैसी ही स्थिति थी जब करीब छह साल पहले बड़े बेटे कार्तिक का दसवीं का परिणाम आया था। उस वक्त में दिल्ली में था और मन कर रहा था कि उड़कर चंडीगढ़ पहुंच जाऊं। खैर इस बार मैं इतनी दूर नहीं था। घर महज पांच सौ मीटर की दूरी पर। मैं इंटरनेट पर परिणाम देखने की कोशिश कर ही रहा था कि बड़ा बेटा और कोचिंग वाले देख चुके थे। सच में बेटे ने कमाल किया था उसके 99.4 प्रतिशत अंक आये। दो विषयों गणित और विज्ञान (maths and science)में शत-प्रतिशत। बहुत खुशी हुई। ऑफिस में काम भी जोरों पर था। आसपास बैठे एक-दो मित्रों को बताया। कुछ लोगों ने बहुत खुशी जताई और बधाई दी। अनेक जगह से फोन आये। कुछ ने कहा कि अपने अखबार (दैनिक ट्रिब्यून) में भी छपवाओ। मैंने कहा, मेरा बेटा नहीं होता तो मैं जोर देकर कहता कि ट्रिब्यून स्कूल का मामला है, इसे छापिये। खुद के बेटे की मार्केटिंग करना मुझे नहीं सुहाया। रात करीब 10 बजे चारू मैडम का फोन आया। उन्होंने बधाई दी। प्रेस रिलीज भेजी और खबर लगाने के लिए कहा। पता चला कि सिटी का पेज रिलीज हो चुका है। साथ ही ताकीद हुई कि कल लगा देना। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे द ट्रिब्यून (The Tribune)के चीफ फोटोग्राफर प्रदीप तिवारी जी का फोन आया। बोले, 'आपको बधाई, बेटे की फोटो भेजो।' मैंने एक फोटो भेज दी। अगले दिन The Tribune में बहुत बेहतरीन ढंग से खबर लगी। वह खबर देखते ही देखते बहुत वायरल हो गयी। इस बीच, बच्चे के कोचिंग सेंटर से फोन आया कि बच्चा और माता-पिता दोनों कोचिंग सेंटर आ जाओ। वहां गए। कुछ बातें हुई। शाम को फिर वरिष्ठ पीआरओ का फोन आया। उन्होंने बताया कि बच्चे का कई चैनल्स पर इंटरव्यू हुआ है। इस बीच हमारे गांव (Ranikhet)में कुछ लोगों ने धवल की बाइट देख ली। फिर तो Whatsapp ग्रूप में बधाई संदेशों का तांता लग गया। भाभी-भतीजी, दीदीयों, भानजों, भानजियों के फोन आने लगे। इसके अगले दिन सकूल गये, इसका जिक्र आगे होगा। इसी दौरान PW से फिर फोन आया। वे लोग घर आए। कुछ लोगों ने धवल के बारे में अन्यत्र खबर छपवाने को कहा। मुझे लगा कि यह कुछ ज्यादा हो रहा है। बेटा धवल भी बहुत असहज हो रहा था। उसे समझाया कि एक-दो दिन की बात है, फिर सब सामान्य हो जाएगा। साथ ही ताकीद की कि कभी भी इस सफलता को अपने दिल-दिमाग पर हावी मत होने देना। अभी तो पहली सीढ़ी है। जीवन में पग-पग पर परीक्षाएं देनी पड़ती हैं। यह सीख हमें हमारी माताजी ने दी। वह भविष्य के प्रति बहुत सकारात्मक रहती थीं और परेशानियों से बहुत घबराती नहीं थी, खुशी के पल में बहुत ज्यादा प्रफुल्लित नहीं होती थीं। हम से कहती थीं, आज थोड़ी परेशानी है तो कोई बात नहीं, कल अच्छा होगा।
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यह सफलता ऐसे ही नहीं मिली
यह सफलता अनपेक्षित नहीं थी। दसवीं की बोर्ड परीक्षा खत्म होते ही बेटे धवल (Dhawal Tiwari)ने पूछा, 'पापा कितने नंबर आने चाहिए कि आप खुश हो जाओ।' मैंने कहा, बेटा नंबर चाहे जो आएं, आप मुझे मेहनत करते हुए दिख रहे हो, यही बहुत है। उसने एक बार फिर अपना सवाल दोहराया। फिर बोला, प्लीज पापा। मैंने कहा कि तुम्हारा बड़ा भाई भी पूछता था तो मैंने कहा था कि 95 प्लस की तो उम्मीद है। धवल ने तपाक से कहा। आप बेफिक्र रहो, 96 कनफर्म। मैंने भी कहा, हां मुझे भी लग रहा है। असल में बेटा स्कूल और कोचिंग की पढ़ाई के अलावा 6 से सात घंटे अलग से पढ़ाई करता था। उसने स्कूल के दो-दो प्री बोर्ड, कोचिंग के प्री बोर्ड के अलावा घर में हर विषय के सैंपल पेपर पांच-छह बार किए थे। वह तीन घंटे परीक्षा हाल की तरह बैठता, फिर अंसर शीट निकालकर मुझे दे देता। मैं उसे चेक करता। हर बार उसके नंबर 95 से 98 के बीच आते। एकाध बार कहता कि आप इतने खुलकर नंबर मत दो। मैं कहता कि मैं सीबीएसई पैटर्न के आधार पर ही दे रहा हूं। फाइनली परीक्षाएं संपन्न हुईं। रिजल्ट आया और धवल सौ के करीब पहुंचते-पहुंचते बेहतरीन अंकों के साथ पास हुआ। अब आगे की डगर देखनी है। करिअर के सफर में यह पहली डगर है, इसे अच्छी तरह भरा है अब आगे देखना है। ईश्वर धवल को स्वस्थ रखे।
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प्रिंसिपल रानी पोद्दार मैडम का आशीर्वाद और The Tribune स्कूल के महान टीचर्स
रिजल्ट के बाद प्रिंसिपल मैडम रानी पोद्दार जी के साथ हुई बातचीत से पहले थोड़ा फ्लैशबैक में जाना चाहूंगा। करीब दो साल पहले जब वह स्कूल की प्रिंसिपल बनीं तो उसी बीच एक PTM मैं जाने का मौका मिला। मैंने पत्नी को बाहर बिठाकर कहा कि मैं नयी प्रिंसिपल से मिलकर आता हूं। मैं उनके ऑफिस में गया और वहां उनकी पीएए मैडम से मिलने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने पूछा, क्या आपने अपाइंमेंट लिया है। मैंने कहा मैं एक पैरेंट के रूप में नहीं, बतौर पत्रकार मिलना चाहता हूं क्योंकि स्कूल के इवेंट को दैनिक ट्रिब्यून के लिए कवर करता हूं। वह मैडम बोलीं, आप चारू मैडम से मिल लो। मैं चुपचाप बाहर आया और घर आ गया। सकारात्मक सोचने की ही हमेशा कोशिश करता हूं इसलिए मान लिया कि अभी रानी मैडम यहां सिस्टम को समझ रही होंगी। ठीक ही है। फिर मुलाकात हो जाएगी। इसके कुछ समय बाद ही मुझे पता चला कि वह मेरे बेटे धवल को भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल (IISER) भेजना चाहती हैं। एक हफ्ते का विज्ञान सेमिनार था। धवल ने घर आकर पूछा पापा क्या जा सकता हूं। उन दिनों किसान आंदोलन चल रहा था। ट्रेनों का Schedule बिगड़ा हुआ था। मन में अनेक आशंकाएं थीं, फिर भी कह दिया कि हां कर देना। साथ ही तारीख पूछकर रिजर्वेशन भी करा लिया। मैंने तय किया कि मैं छोड़कर आऊंगा। उसी रात वापस आकर हफ्तेभर बाद फिर लेने चला जाऊंगा। जाने का और मेरे आने का कनफर्म हो गया, लेकिन धवल के साथ वापसी वाला वेटिंग में था। मुझे लगा कि तब तक कनर्फ्म हो ही जाएगा। खैर... । इधर, मेरे मन में तमाम सवाल थे, उधर प्रिंसिपल मैडम के ऑफिस से फोन आया कि आप स्कूल आ जाएं। मैं अगले दिन तय समय के अनुसार पहुंच गया। वहां अकाउंट सेक्शन में रवींद्र झा जी ने कहा कि आप टिकट शेयर कीजिए और एक अप्लीकेशन लिखिए। मुझे आश्चर्य हुआ कि टिकट के पैसे स्कूल ने दे दिए। फिर उन्होंने कहा कि आप प्रिंसिपल मैडम से मिल लीजिए। जब उनसे मिला तो उनकी सहजता, सरलता और बच्चों के प्रति तन्मयता से गदगद हो गया। फिर याद आए अपने पुराने एक गुरु, जो कहते थे कि किसी के बारे में धारणा बनाने में जल्दबाजी मत करना। बाद में धवल सेमिनार से लौटकर आया। उसके बाद एनुअल फंक्शन में धवल को कुछ पुरस्कार मिले। उस दिन धवल किसी अन्य स्कूल में The Tribune School की ओर से कंप्यूटर संबंधी किसी प्रतियोगिता में भागीदारी के लिए गया था। इधर मैं और पत्नी स्कूल के कार्यक्रम में बैठे थे। मंच से धवल का नाम पुकारा गया। मुझे लगा कि कुछ देर में ही कह दिया जएगा कि धवल यहां मौजूद नहीं है। लेकिन तभी प्रिंसिपल मैडम ने कहा कि धवल के पापा यहां बैठे हैं, वह आ जायें। मैं दौड़ता हुआ गया और पुरस्कार लिया। थोड़ी देर में एक और प्राइज मिला। कुछ देर बार सचिन सर (Sports teacher) मेरे पास आए, बोले, सर आप धवल को जल्दी से ले आओ, उस स्कूल में प्रतियोगिता खत्म हो चुकी है। धवल को एक प्राइज और मिलना है। मैं कुछ सोचने लगा, बोले सर आप सोचो मत, सरप्राइज है, चले जाओ। मैं करीब आधे घंटे में लौटकर आया। जैसे ही धवल गेट पर पहुंचा, मंच से घोषणा हुई आल राउंडर की। धवल दौड़कर गया, प्रिंसिपल मैम ने उसे पुचकारा और उसे आल राउंडर का प्राइज मिला। इसके बाद एक दिन विशेष पीटीएम में प्रिंसिपल रानी जी का अलग अंदाज दिखा। टीचर्स, प्रिंसिपल और स्कूल मैनेजमेंट कमेटी सदस्यों के बजाय उन्होंने पैरेंट्स को बोलने का मौका दिया। हर किसी ने अपने अनुभव साझा किए। स्कूल में यह नया अंदाज सबको भाया। मुझे भी उस दौरान बोलने का मौका मिला। वैसे मैं खुशकिस्मत हूं कि अनेक स्कूलों जिनमें द ट्रिब्यून स्कूल भी शामिल है, में मुझे मोटिवेशनल स्पीच के लिए बुलाया जाता रहा है। साथ ही कहानी-कविता लेखन पर भी बोलने का मौका अतीत में मिला है। अब जब धवल का रिजल्ट आया तो प्रिंसिपल रानी पोद्दार मैडम का खुद फोन आया। अगले दिन धवल को लेकर मैं और पत्नी भावना उनके ऑफिस गए। वहां मैडम ने अपने अनुभव बताये। अतीत की कई बातें बताईं, साथ ही बच्चों को समझाने डांटने के भी कई किस्से। प्रिंसिपल मैडम ने बताया कि The Tribune Trust Chairman Mr. NN Vohra सर का धवल का नाम लेकर मेल आया है कि उसको आशीर्वाद देना है। इस बच्चे ने जस्ट 100 को टच किया है। यह बात सुनकर मैं बेहद भावुक हो गया और खुद को बहुत blessed माना। बातों-बातों में प्रिंसिपल मैडम ने हमारी (मेरी और पत्नी) की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि बच्चे की मेहनत के साथ ही आप लोगों का संघर्ष भी मायने रखता है। मैंने कहा मैडम मुझसे ज्यादा तो सचमुच पत्नी का devotion है। उसने कई पारिवारिक कार्यक्रमों में भी नहीं जाने का निर्णय लिया, जबकि मैं तो तमाम आयोजनों में भी शिरकत करता रहा।
प्रिंसिपल मैडम से बातचीत के दौरान चारू मैडम ने हमारी फोटो खींची (ब्लॉग में फोटो ऊपर साझा की है)। ट्रिब्यून स्कूल में शुरू से ही रजनी मैडम, निधि मैडम, रंजू मैडम, कुसुम मैडम, बिनेश सर, सचिन सर, आशीष सर, आशू सर, अतुल सर, पनीत मैम, मीनू मैडम, अंजना मैडम, रुचि मैडम, समर मैडम, विनिमा मैडम, आशा मैडम के साथ ही पहले से वंदना सक्सेना मैडम (पूर्व प्रिंसिपल : इनसे भी बच्चों को बहुत गाइडेंस मिला), अनुपमा मैडम, सीमा मैडम, सीमाश्री मैडम, निकिता मैडम, अवलीन मैडम सहित अनेक टीचर्स का सहयोग रहा। इन सबके साथ ही चांद नेहरू मैडम (स्कूल कमेटी मेंबर) ने कई बार मोटिवेशनल स्पीच देकर हौसला बढ़ाया। इस स्कूल से अतीत और वर्तमान में मिले सहयोग को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। महान संतों के कुछ दोहे हैं, उन्हीं के जरिये अपनी भावनाओं को व्यक्त करना चाहता हूं।
सब धरती कागद करूं, लेखनि सब वनराय, सात समंद की मसि करूं, गुरु गुन लिखा न जाय।
गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट। अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट।
राम नाम के पटतरे देबे को कछु नाहीं, कह लौं गुरु संतोषिये हौस रही मन माहिं।
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PW के टीचर्स और स्टाफ का भी धन्यवाद
बड़े बेटे कार्तिक ने अपने अनुभव हम लोगों से साझा करते हुए कहा कि धवल को आठवीं से ही कोचिंग भेज दो। हमने धवल के मन को टटोला, वह भी ऐसा चाहता था। हमारी ओर से कोई जोर-जबरदस्ती नहीं थी। फिर तय हुआ कि ऑनलाइन स्कॉलरशिप को देखो, कहीं मिल गयी तो कोचिंग भेज देंगे। उस वक्त फिटजी में टेस्ट हो रहे थे। इसने 90 प्रतिशत स्कॉलरशिप के लायक अपना काम कर दिया। धवल को हमने वहां भेज दिया। कम पैसे में काम बन गया। बहुत दुखद रहा कि फिटजी एक साल बाद ही बंद हो गया। फिर हमें सुझाव मिला कि Physics Wallah यानी PW में जायें। वहां बच्चे का एक जनरल टेस्ट हुआ। फिर फीस में कुछ छूट के साथ एडमिशन मिल गया। यहां का पूरा स्टाफ और सभी टीचर्स मसनल- रीटा मैडम, अंकित सर, रागिनी मैडम, खुशबू मैडम, शुभम सिंगला सर, शुभम सर आदि सभी का बहुत सहयोग मिला। पीटीएम में सभी टीचर जरूरी सुझाव देते और जरूरत पड़ने पर स्टाफ ने भी मदद की। इस दौरान अलख पांडेय जी के बारे में जानने-सुनने की जिज्ञासा हुई। वही इस संस्थान के फाउंडर मेंबर हैं। उन पर बनी बायोपिक देखी। उनके अनेक वीडियो देखे। कपिल शर्मा शो में उनको देखा और उनके विचार नेक लगे। इसी बीच, बोर्ड परीक्षाओं के आते-आते हमें फिजिक्स वाला की ओर से बताया गया कि बच्चे का बेहतरीन परफारमेंस रहा है, इसलिए इसे स्कॉलरशिप ऑफर की जाती है। हमने एडॉप्ट कर ली। बच्चा लगातार वहीं पढ़ रहा है। आगे की राह और कठिन है, लेकिन घबराना नहीं। धवल बहुत बधाई, आशीर्वाद। खुश रहो और स्वस्थ रहो।
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और भव्य जोशी ने किया नाम रोशन
इस पूरे ब्लॉग में अगर भव्य का जिक्र न हो तो यह ब्लॉग अधूरा है। दरअसल भव्य जोशी धवल का क्लासमेट है। इससे पहले वह मेरी पत्नी भावना के जुड़वां भाई भास्कर जोशी का सुपुत्र है। भास्कर का दो साल पहले चंडीगढ़ ट्रांसफर हो गया। उन्होंने और उनकी पत्नी प्रीति ने इसके एडमिशन की बात की। हम लोग पहले एसडी स्कूल, सेक्टर 32 गये। वहां कुछ पैसे जमा कर सीट बुक करवा ली। यह बुकिंग भव्य के पिछले रिकॉर्ड को देखकर हुई। वह भी लगातार बेहतरीन अकेडमिक रिकॉर्ड वाला बच्चा रहा है। फिर भास्कर ने इच्छा जताई कि उसका भी ट्रिब्यून स्कूल में एडमिशन हो जाये तो। मैंने स्कूल में संपर्क साधा। आशू सर ने बताया कि रिटन टेस्ट होगा। भव्य का किसी तरह एडमिशन हो गया। अब वह भी करीब 97 प्रतिशत अंकों के साथ टॉपर्स में शुमार है। धन्यवाद भव्य तुमने स्कूल के साथ-साथ मेरा भी नाम रोशन किया क्योंकि स्कूल वाले अक्सर कहते थे और कह रहे हैं कि आपने लाजवाब बच्चे का एडमिशन कराया। अपनी इस छवि को बनाये रखना। हम सबका आशीर्वाद तुम्हारे ऊपर है। भव्य के माता-पिता और बुआ को भी बधाई।
संबंधित कुछ फोटो कटिंग साझा कर रहा हूं







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