केवल तिवारी
साभार दैनिक ट्रिब्यून
बंगाल जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पैनी नजर अब पंजाब पर है। अकाली दल के साथ पहले भी पंजाब में सत्ता का स्वाद चख चुकी भाजपा अब यहां 'एकला चलो' की रणनीति पर काम कर रही है। बेशक पंजाब के सियासी शतरंज में शह-मात के खेल में गोट फिट करना टेढ़ी खीर है, लेकिन पश्चिम बंगाल और असम जैसे 'बॉर्डर स्टेट्स' के बाद अब वह पंजाब के लिए 'सरहदी राज्य का नारा' देने की तैयारी में है। भाजपा मुख्यालय में बंगाल-असम जीत के जश्न के दौरान भी इसकी झलक मिली। दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के साथ इस जश्न में अनेक सिख शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के दौरान इन लोगों ने खूब नारे लगाए। पंजाब को लेकर भाजपा इसलिए भी उत्साहित है क्योंकि उसे यकीन है कि फिर से एकजुट हो रहे 'इंडिया' गठबंधन की एकता यहां नहीं रहेगी। इस राज्य में कांग्रेस तो अकेले लड़ेगी ही, आम आदमी पार्टी (आप) सत्ता में वापसी की अलग से पूरी कोशिश करेगी। आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल कह चुके हैं कि भाजपा के विजय रथ को पंजाब रोकेगा। अकाली दल अपनी तैयारी कर ही रहा है। कुछ अन्य क्षेत्रीय दलों की भी चुनाव में भूमिका होती है। ऐसे में भाजपा बिखरे विपक्ष का फायदा उठाएगी। इसी तरह का लाभ उसे बंगाल और असम में भी मिंला है। चुनाव परिणाम के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में दिल्ली के पूर्व सीएम केजरीवाल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के लिए ये आखिरी विजय हैं। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब के बाद मोदी सरकार गिर जाएगी। आप से भाजपा में गए राज्यसभा सदस्यों का जिक्र करते हुए केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने पंजाबियों की इन सीटों को लूटा है। यहां उल्लेखनीय है कि बंगाल, असम चुनाव परिणाम के बाद विपक्ष के सभी बड़े नेता आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा ने सीटों को लूटा है या चोरी की है। पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पहली प्रतिक्रिया में आरोप लगाया कि भाजपा ने सौ सीटों की लूट की है। इसी तरह सपा प्रमुख अखिलेश यादव एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी चुनाव में सीट चोरी का आरोप लगाया है। वह मोदी के खिलाफ अक्सर 'चोरी' शब्द का इस्तेमाल करते हैं। इस बीच, भाजपा नेताओं ने 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में मिली सफलता को दोहराने का भरोसा जताया है। भाजपा के रणनीतिकार सरहदी राज्य की सुरक्षा, नशा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। वैसे पंजाब के अलावा अगले साल गुजरात, गोवा, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में भी चुनाव हैं, लेकिन भाजपा के लिए पंजाब प्रमुख है। पार्टी यहां अपना वर्चस्व बनाकर एक संदेश देने की कोशिश में है। अन्य राज्यों में भी भाजपा की तैयारी जोरों पर है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। इन राज्यों में पार्टी पदाधिकारियों की विभिन्न बैठकों में भाग ले चुके नबीन अब पीएम और गृह मंत्री अमित शाह के साथ चर्चा कर रहे हैं। इन राज्यों के साथ ही भाजपा उत्तराखंड के लिए भी जोरशोर से जुट गयी है। उत्तराखंड, गुजरात भी एक तरह से सरहदी राज्य हैं। उत्तराखंड में जहां चीन और नेपाल की सीमाएं लगती हैं, वहीं गुजरात का एक हिस्सा पाकिस्तान सीमा से सटा है। पंजाब भी पाकिस्तान सीमा से सटा है। मणिपुर राज्य भी म्यांमार से सटा है और यहां कुछ समय तक अशांति रही। हालांकि अभी भी इस सरहदी राज्य में हिंसा की छिटपुट वारदातें हो रही हैं। दो समुदायों के बीच संघर्ष को सुलझाने का काम भाजपा सरकार नहीं कर पाई है। मणिपुर को लेकर कांग्रेस अनेक बार भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधती रही है।
काबिल-ए-गौर है कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भाजपा की सरकार है, जबकि पंजाब में आप और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 207 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया। यहां उसने तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत कर दिया। असम में सत्तारूढ़ राजग दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के बाद लगातार तीसरी बार राज्य में सत्ता में लौटा है। राजग ने 126 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा ने 82 सीट पर जीत हासिल की जबकि उसके सहयोगी दलों- बोडो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और असम गण परिषद (एजीपी) को 10-10 सीट पर जीत मिली है। राज्य में भाजपा ने पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल किया है। भारत के ज्यादातर राज्यों में काबिज हो चुकी भाजपा या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) अब पूरा जोर पंजाब पर लगाएगी। उधर, हालिया हार के बाद इंडिया गठबंधन एकजुट होने की एक बार फिर कोशिश कर रहा है। अब देखना होगा कि पंजाब में भाजपा अपने पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के साथ फिर से मैदान में उतरने की कोशिश करती है या फिर इस राज्य में भी वह कोई नया प्रयोग करेगी। वैसे दोनों दलों के कुछ स्थानीय कार्यकर्ता इस गठबंधन को जरूरी बता रहे हैं, लेकिन शीर्ष स्तर पर इस तरह की किसी चर्चा की कोई बात सामने नहीं आई है। इस एका की बात के उलट भाजपा के बड़े नेता सार्वजनिक मंचों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं। लगभग आठ महीने बाद चुनावी रण में पार्टियां नजर आएंगी। देखना होगा कि पुरजोर कोशिश में लगी भाजपा को उसके विरोधी दल रोकने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं।


No comments:
Post a Comment