Monday, February 23, 2009

--- पर केवल आगे कैसे बढोगे

मुझे एक पुरानी बात याद आ रही है। अगर यह ब्लॉग वो पढ़ें तो संभवतः समझ जायेंगे। मुझसे एक पुराने बॉस ने कहा था केवल तुम बहुत योग्य, अच्छी समझ रखते हो, लेकिन तुममें आगे बढ़ने के सब गुण नहीं हैं। मैंने इन सब बातों का अपने हिसाब से अंदाजा लगा लिया। कुछ मूड ख़राब होने जैसा और कुछ वास्तविकता से ख़ुद को करीब रखने जैसा। आज में उस वाकये को याद कर रहा हूँ। बल्कि उसी वाकये को नहीं बल्कि एक और बहुत सीनियर व्यक्ति की बात याद कर रहा हूँ। उन्होंने मुझसे कहा था मुझे लगता है तुम्हारी तरक्की में तुम्हारा व्यक्तित्व आड़े आ जाता है। यहाँ मैंने जो समझा और उन्होंने जो समझाया दोनों एक ही बात थी। उनका मतलब था की में सबकुछ ठीक हूँ लेकिन शारीरिक बनावट और मेरी ड्रेसिंग लचर रहती है। फेस वेलू पर रियल वेलू पर हावी हो जाती है। जीवन चक्र में कुछ बातें समझ में आने लगती हैं और धीरे धीरे आपको अपनी गलती का भी अहसास भी होने लगता है। बस बहुत देर न हो जाए इस बात का ध्यान रखना पड़ता है। इन अनुभवों पर में किताब लिखूंगा। में यह भी जनता हूँ की मेरी कोई ओकात नहीं है लेकिन अपनी बात कहने और रखने का एक प्राकृतिक हक़ के साथ में कुछ लिखूंगा और कहूँगा। खैर जीवन चक्र पर यह भी नहीं भूलना चाहिए की जिन लोगों ने हमारी सुनी, हमें समझा और उसी हिसाब से सम्मान दिया उनको याद करना चाहिए। उन्हें भी जिनकी वजह से यह सब लिखने को प्रेरित हुआ। चूंकि में भाग्यवादी भी हूँ तो क्यों न भाग्य पर भरोसा करते हुए जीवन पथ पर बढ़ते जाऊं

2 comments:

परमजीत बाली said...

अपनी भावनाओ को व्यक्त करना सही कदम है।बहुत अच्छी पोस्ट लिखी है।

kewal tiwari said...

thanx