Sunday, June 18, 2017

हिमाचल के बद्दी की छोटी सी यात्रा



सफर के दौरान ही दिखा ईंट भट्टा

रासते में हरियाली ही हरियाली

सफर के बीच में पड़ा पंजाब का कुछ हिस्सा
पिछले दिनों अपने मित्र सुनील कपूर के साथ बद्दी जाने का कार्यक्रम अचानक बन गया। यूं इस यात्रा में उल्लेख करने लायक कुछ नहीं है, लेकिन चंडीगढ़ से बद्दी तक की सड़कें लाजवाब रहीं। गाड़ी फर्राटा भरती रही। रास्तेभर फल बेचने वालों की कतार लगी रही। यहीं से कुछ आम और आड़ू लिए। इस सीजन के पहले आम। रास्ते में ईंट के भट्ठे देखे। लखनऊ में जब रहता था तो ईंट भट्ठों के पास अक्सर जाया करते थे। घर से आलू और शकरकंदी ले गये। भट्ठे की गरम राख में दबा दिया। कुछ देर खेलकूद में मस्त फिर शकरकंदी और आलू निकालकर खाना। अब तो कहीं-कहीं ही भट्ठे दिखते हैं। लखनऊ में हमारे घर के आसपास जहां ये ईंट भट्ठे थे, वहां अब उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की हाउसिंग स्कीम लॉन्च हो गयी है। बड़ी-बड़ी बस्तियां बस गयीं हैं। जहां खेत-खलिहान होते थे, वहां साइकिल से भी निकलना मुश्किल होता है। इसे विकास का असमान विस्तार कहा जाये या फिर कुछ फिलहाल बद्दी के मार्ग पर तो सड़कें भी चकाचक हैं और पेड़-पौधों के अलावा ईंट-भट्ठे भी दिखते हैं। रास्ते में कुछ देर सुस्ताने का मन हो तो उसके लिए भी कहीं-कहीं जगह दिख जाती है। वैसे विस्तार से घूमने का कार्यक्रम बनाऊंगा तो संभवत: और आनंद आयेगा। एक टोल भी पड़ा। कोई पर्ची नहीं, बस उसने 40 रुपये मांगे और जाने के लिए कह दिया।
-केवल तिवारी