indiantopbligs.com

top hindi blogs

Wednesday, April 1, 2026

कुक्कू का यज्ञोपवीत संस्कार, धार्मिक स्थल पर दिखा मेरा परिवार

केवल तिवारी

कुक्कू की जनेऊ करवाई,

मां बहुत याद आई।

लग रहा था उस जहां

से बरस रहा आशीर्वाद

तभी तो सब लोगों

ने मिलकर

पूर्ण कर दिया काज।

आचार्य गोविंद वल्लभ जी का

दिल से धन्यवाद

पंडित केवलानंद जी का

हार्दिक आभार।

सचमुच अनूठी परंपरा है हमारे यहां। हर शुभ कार्य के मौके पर पूर्वजों को याद किया जाता है। लखनऊ से भाभी (राधा तिवारी) संग पहुंचे दाज्यू (भुवन चंद्र तिवारी) जब आवदेव (पितरों का विशेष पूजन) में बैठे और पंडित जी ने दादा, पिताजी, माताजी का नाम लेने को कहा तो मैं भावुक हो गया। अपने पितरों की विस्तृत कहानी क्या कहनी, लेकिन माताजी, ससुर जी, तीन जीजाजी और कोरोना का ग्रास बने बिपिन की बहुत याद आई। माताजी यानी ईजा कुक्कू को मेरी तरह नफरी कहती थी। मेरे ससुर इसे गोबर गणेश कहते थे। बचपन में यह ज्यादा तंग नहीं करता था, अब तो बिल्कुल ही नहीं करता। खैर... चलिए पितरों का पूजन हो रहा था तो उनकी याद आनी लाजिमी थी, लेकिन साथ लग रहा था कि गंगा किनारे उस जहां से सभी पितर आशीर्वाद दे रहे हैं और इसी आशीर्वाद का परिणाम था कि कुछ दिनों से मन में हो रही धुकर-धुकर से इतर आखिरकार मेरे ज्येष्ठ सुपुत्र कार्तिक तिवारी का जनेऊ संस्कार निर्विघ्न संपन्न हो गया। तमाम किंतु-परंतु से हटकर हरिद्वार जाना बहुत आनंददायक और आध्यात्मिक रहा। इस आयोजन में आये लोगों से मुझे बल मिला और महसूस हुआ कि मैं अकेला नहीं हूं। कामकाज के मौके पर मेरा परिवार मेरे साथ है। आचार्य गोविंद वल्लभ जोशी जी का दिल से धन्यवाद है क्योंकि उन्होंने पंडित केवलानंद पांडेय जी से परिचय करवाया और पांडेय जी ने ही हरिद्वार में पूजा संपन्न कराई। उनकी बुलंद आवाज और लयबद्ध श्लोक उच्चारण से आत्मिक शांति मिली और मां गंगा की आरती के दिव्य दर्शन हुए। मैं खुशकिस्मत हूं कि श्रेष्ठ ब्राह्मण माने जाने वाले भानजे-भानजियों में अनुपात समान है। यानी पांच भानजियां और पांच भानजे। कुछ कारणों से सब नहीं पहुंच पाये, लेकिन प्रिय गौरव के अलावा भानजी रुचि और रेनू ने सपरिवार पहुंचकर मेरे कामकाज में मानो चार चांद लगा दिये। भाभी-दाज्यू इस कार्यक्रम में विनीत थे, उनके सानिध्य में प्रेमा दीदी जो कुक्कू के पैदा होने के समय पर भी पहले ही पहुंच गयी थी, का विशेष प्यार मिला। उससे गले मिलते वक्त भावुक हो गया था और जीजा जी जिनका नाम मैंने अपने फोन में जीजाजी मिश्राजी करके सेव किया था, याद आ गये। मैंने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए उसके गाल थपथपाए और सप्रयास हंस दिया। इसी मौके पर मुझे पुष्पा दीदी की भी याद आयी। उसने ही मेरी शादी तय करवाई और उसी के घर से विवाह के सभी कार्यक्रम संपन्न हुए। कार्यक्रम में दाज्यू लोगों के संग मुझसे पहले ही पहुंचीं शीला दीदी और पूरन जीजा जी का स्नेह तो वर्णनातीत है। अधिकारपूर्वक उनसे कई आग्रह कर लेता हूं। मुझे समय-समय पर अच्छी सीख देते हैं और मदद करने में आगे बढ़कर रहते हैं। इन सबके बीच हमारी पूजनीय भाभी जी (हरीश की ईजा) और उनके संग प्रकाश एवं दोनों भाइयों का पूरा परिवार। साथ में भतीजा हेम और दीप तिवारी एवं उसका परिवार। इन सबके साथ इस विशेष पवित्र कार्यक्रम की शोभा बढ़ी मेरी सभी भतीजियों का प्रतिनिधित्व करने वाली निर्मला से। वह सपरिवार पहुंची और बेटे को आशीर्वाद दिया। दर्शन जी, दीपेश जी और कुलदीप जी के साथ भानजे गौरव को ब्राह्मण देवता स्वरूप सामने देखकर बहुत ही प्रसन्नता से मेरा काम संपन्न होता चला गया। जो लोग नहीं पहुंच पाए उन्होंने फोन पर बधाई दी। बड़ी दीदी विमला दीदी ने फोन पर खूब आशीर्वाद दिया और कुक्कू को बधाई दी। भतीजी कन्नू ने भी फोटो भेजते रहने के लिए कहा।

ससुराल पक्ष का वह अविस्मरणीय सहयोग

इस शुभ कार्य की तैयारी बहुत पहले से चल रही थी। इस तैयारी में मेरी पत्नी भावना के बड़े भाई यानी बच्चों के बड़े मामा नंदाबल्लभ जी की पत्नी आदरणीय भाभीजी, उनकी बिटिया नेहा, दूसरे भाई शेखर जोशी और उनकी पत्नी लवली भाभी का विशेष सहयोग रहा। साथ ही में भावना के जुड़वां भाई भास्कर जोशी (राजू), उनकी पत्नी प्रीति संग हम चंडीगढ़ में ही बातचीत करते और योजनाएं बनाते। राजू ने परिजनों के चाय-नाश्ते और लंच-डिनर की व्यवस्था में विशेष सहयोग किया। प्रीति यानी पिंकी तो प्रसन्न मुद्रा में सबके साथ घुलमिल कर उत्साह को दोगुना कर देती है। शेखरदा अक्सर तैयारी के बाबत पूछते रहते। लवली भाभी ने चंडीगढ़ आकर सुंदरकांड एवं श्री सत्यनारायण कथा संबंधी कार्यक्रम में खूब सहयोग किया। साढू भाई सुरेश पांडेय जी नहीं पहुंच पाए क्योंकि उनकी माताजी (जिन्हें मैं ईजा कहता हूं) इन दिनों बहुत ज्यादा अस्वस्थ हैं। लेकिन फोन पर उनसे बात होती रहती और हरिद्वार में कार्यक्रम संपन्न होते ही उनका बधाई संदेश एवं फोन आ गया। इन सबका सहयोग अविस्मरणीय है। धन्यवाद शब्द तो इसके लिए बहुत छोटा है। हां इनसे बच्चों के प्रति आशीर्वाद की दरकार हमेशा रहेगी ही। बच्चों के जिक्र में छोटे बेटे धवल, शेखरदा के बेटे सिद्धांत जोशी (सिद्धू) एवं राजू के बेटे भव्य का उत्साहजनक माहौल बनाए रखने एवं छोटे-छोटे, लेकिन थकाऊ काम को संपन्न कराने में विशेष सहयोग रहा। इन सबको ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद।


मां गंगा की दिव्य आरती और स्नान

हरिद्वार पहुंचे तो बिश्नोई धर्मशाला में भाभी-दाज्यू, शीलादी-जीजाजी पहुंचे हुए थे। कुछ ही देर में चंडीगढ़ से हम आठ लोग पहुंच गए। थोड़ी देर में काठगोदाम की टीम भी आ गयी। दोपहर बाद पंडित केवलानंद पांडेय जी भी मिलने आई। उन्होंने पूछा कि क्या गंगा आरती देखनी है, हम सबने उत्साहपूर्वक हां में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आरती तो साढ़े छह बजे होगी, लेकिन पहुंचना पड़ेगा पांच बजे। हम सब थके हुए थे। एकबारगी गंगा तट पर जाने का कार्यक्रम टालने का सा मन हो गया, लेकिन कुछ ही देर में मां गंगा का आशीर्वाद ऐसा असर कर गया कि बच्चों को छोड़कर (भव्य साथ गया) हम सब पहुंच गये। पंडित जी ने एकदम करीब ही बैठने की व्यवस्था कर दी। वह स्वयं गंगा आरती करवाने वालों में शामिल थे। पहले ही कह चुके थे कि पांच बजे बाद फोन नहीं उठा पाऊंगा। हम लोगों ने देश-विदेश से आए हजारों लोगों के साथ गंगा आरती में भाग लिया। प्रणाम किया और लौट आये। एक-एक चाय पीकर कमरों में गये और तब तक दो भानजियां सपरिवार पहुंच गयीं और कुछ देर बाद भतीजा प्रकाश भी सपरिवार वहां पहुंच गया। कुछ देर मुलाकात के बाद बाकी लोग कहीं अन्यत्र चले गये, उन्होंने अपने ठहरने की अलग व्यवस्था कर रखी थी। फिर चला मेहंदी का कार्यक्रम। गीत-संगीत। इसी बीच चर्चा हुई कि क्यों ने सुबह-सुबह गंगा स्नान किया जाये। साथ ही पंडित जी ने कहा था कि अगर सुबह की आरती देखनी हो तो भी आ सकते हैं। हम लोग रात करीब एक बजे सोये होंगे, लेकिन उत्साह ऐसा कि सुबह चार बजे उठ गये। करीब सवा पांच बजे हम लोग हर की पौड़ी पहुंच गये। वहां सबने स्नान किया और लौट आये।


और जनेऊ संस्कार, सुंदरकांड व श्रीसत्यनारायण कथा संपन्न

करीब दस बजे पंडित जी बिश्नोई धर्मशाला के पास ही भीमगोड़ा घाट पहुंच गये। कार्यक्रम शुरू हुआ। भाभी जी लोगों ने शकुनआखर और भगवत भक्ति के अन्य गीत गाये। इस बीच, सभी परिजन पहुंच गये। बीच-बीच में चाय का दौर चला और बूंदाबांदी भी हुई। बेहतरीन तरीके से कुक्कू का जनेऊ संस्कार संपन्न हो गया। रात करीब आठ बजे हम लोग चंडीगढ़ पहुंच गये। लखनऊ से आये दाज्यू-भाभी भी हमारे साथ ही आये। अन्य लोग भी यथासमय अपने-अपने घर पहुंच गये। सोमवार को थोड़ा आराम कर मंगलवार को हमने पहले सुंदरकांड का पाठ किया फिर श्री सत्यनारायण पाठ के लिए पंडित जोशी जी पहुंच गये। कुछ लोगों की भागीदारी में कार्य संपन्न हुआ। जीवन चलने का नाम और इसी चलने के नाम पर ही सभी अपने-अपने काम में लग गये हैं। ईश्वर सब पर अपना आशीर्वाद बनाये रखना। जय गंगा मैया। जय ग्वेल देवता। जय भगवती माता। जय ईजा। जय बंबई नाथ स्वामी। जय हो बिनसर महादेव। सर्वेभ्यो, देवेभ्यो नम:



















3 comments:

Anonymous said...

भव्य और दिव्य। जय हो

kewal tiwari केवल तिवारी said...

निर्मल जी भाई साहब ने लिखा हमारी शुभकामनाएं 🌺🌺

kewal tiwari केवल तिवारी said...

भाभी जी नोएडा ने लिखा Beta ko mera shubh aashirvad pyar aap sbko dhero shubhkamnaye r badhaiya bachhe khoob swsth khush r sukhi rhe lifr me kamyabi r tarkki hasil jrte jaye God bless to all sari picx dekh kr bdi khushi hui 🙏😊