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Friday, July 10, 2026

सरल, सहज और सौम्य... यादों में महावीर पंडित अंकल

केवल तिवारी


सरलता, सहजता और सौम्यता... सभी गुण किसी एक व्यक्ति में शायद ही दिखते हों, लेकिन मुझे याद है महावीर पंडित अंकल में ये तीनों बातें मौजूद थीं। इससे भी बड़ी बात थी कि वे औरों की बात भी धैर्यपूर्वक सुनते थे।

अक्सर मेरी पीढ़ी के लोगों का आरोप होता है कि हमारे बुजुर्ग सुनते नहीं, बस अपनी ही कहते चले जाते हैं। महावीर पंडित अंकल में ऐसी बात नहीं थी। ये अंकल मेरे मित्र सुरेंद्र पंडित के पिताजी। सुरेंद्र वह मित्र जिसने हम अनेक मित्रों को कुछ समय के लिए एकसाथ बसा दिया। वह कहानी लंबी और यादगार है। जब साथ रहने लगे तो जाहिर है कि मित्रों के माता-पिता से भी मुलाकात होना लाजिमी था। इस बसने और मिलने के सिलसिले को करीब तीन दशक होने को हैं। हम लोग दिल्ली के पास ही बसे गाजियाबाद के कौशांबी स्थित हिमगिरि अपार्टमेंट में रहते थे। नौवीं मंजिल पर। संघर्ष का दौर था। सभी का था, मेरा थोड़ा सा ज्यादा। कुछ समय के लिए अपनी माताजी को भी साथ ले आया था। उसी दौरान महावीर अंकल का भी आना हुआ। दोनों बातें करते थे। ज्यादातर बातें होतीं- एकादशी कब है, पूर्णमासी कब है। इस बार सोमवार को अमावस्या पड़ रही है, शनिवार को हनुमान जयंती है, वगैरह-वगैरह। बाद में हम मित्रगण अपनी-अपनी गृहस्थी में समाने लगे। लेकिन बोलचाल जारी रही। मित्र सुरेंद्र की शादी में भी मित्रमंडली जुटी। उससे पहले भी अनेक मौकों पर महावीर अंकल से मिलने का मौका मिला। आंटी से भी बातचीत होतीं, लेकिन थोड़ी-बहुत। आंटी भी करीब एक दशक पहले ही दुनिया से रुखसत हो गयीं, पिछले दिनों अंकल भी चले गये। मित्र धीरज का मैसेज देखा। फिर मैंने फोन किया और खुर्जा में उनकी अंत्येष्टि में शामिल हुआ। मुझे याद है जब आंटी की अंत्येष्टि में गया था तो गमगीन माहौल के बीच अंकल लोगों को बता रहे थे कि यह केवल है, चंडीगढ़ से आया है। वह कहते थे लंबे समय तक टिकी रहने वाली दोस्ती और इसे टिकाये रहने वाले दोस्त, दोनों अच्छे होते हैं। उनकी अनेक बातें याद रहेंगी। उम्र के ऐसे पड़ाव में हम लोग पहुंच चुके हैं जब हमारे अपनों का साया उठता जा रहा है। ईश्वर अंकल को अपने श्रीचरणों में स्थान दे। ऊं शांति

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