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Saturday, August 1, 2026

डॉ. शमीम शर्मा जी से मुलाकात, उनकी पुस्तक का विमोचन और गरिमामयी कार्यक्रम

केवल तिवारी

हमारे अखबार दैनिक ट्रिब्यून में शमीम जी का व्यंग्य नियमित छपता रहता है। व्यंग्य के अंत में एक चुटकुले में उनके दो पात्र नत्थू और सुरजा हम लोगों के बीच अक्सर चर्चा में रहते हैं। एक बार उन्होंने किसी गंभीर विषय पर भी टिप्पणी की थी, बेशक टिप्पणी व्यंग्यात्मक थी, लेकिन विषय गंभीर था। ऐसे में उन्होंने खुद ही लिख दिया था आज कोई चुटकुला नहीं। इससे लेखक की संवेदनशीलता का पता चलता है। उनकी रचनाओं पर बात करते-करते मैंने कुछ समय पूर्व अपने संपादक नरेश कौशल जी से कहा कि कभी शमीम साहब से मिलवाइएगा। असल में मिलवाने की बात यूं ही नहीं हुई। उन्होंने अपने पिछले संपादकत्व के दौर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने एक विशेष पुलआउट निकाला और उसमें लेखकों को आमंत्रित किया। इनमें से शमीम जी को 'चौपाल से' कॉलम में लिखने के लिए कहा। बाद में यह कॉलम 'तिरछी नजर' हो गया। मेरे मिलवाने की चर्चा पर संपादक जी मुस्कुराये और बोले कि वे शमीम साहिबा हैं। जल्दी मिलेंगे। संयोग देखिये कि इसी बीच उनकी पुस्तक 'दो बूंद सौ सवाल' के लोकार्पण के समारोह की अध्यक्षता के लिए कौशल साहब को बुलावा आया। उन्होंने मुझसे साथ चलने को कहा। कवरेज भी हो जाएगी और मुलाकात भी। कार्यक्रम बहुत लाजवाब रहा। हरियाणा भवन में आयोजित कार्यक्रम में सभी प्रबुद्धजन मिले। अनेक लोगों से बातें हुईं। सबसे अहम कि डॉ. शमीम शर्मा मैडम से बात हुई। उनके बारे में जितना जानता था, उनसे भी ज्यादा जानने को मिला। बहुत गजब संयोग रहा कि जिस पुस्तक का विमोचन हुआ, उसकी समीक्षा का दायित्व भी मुझे मिला है। पढ़ना शुरू किया है, जल्दी ही पूर्ण कर समीक्षा लिखूंगा। फिलहाल उस दिन की खबर और उसके लिंक को साभार दैनिक ट्रिब्यून यहां पेस्ट कर रहा हूं। साथ ही दो फोटो भी। शमीम जी और उनकी बहू डॉ. सरिता शर्मा जी को हार्दिक शुभकामनाएं। कार्यक्रम में हरियाणा उद्योग विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल जी की सहजता से हिंदी भाषा को लेकर कही गयीं बातें और प्रतीकों माध्यम से जल बचाने के वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर रखे गये विचारों ने बहुत प्रभावित किया। उन्हें साधुवाद। संपादक जी ने यह विशेष मौका मिला उन्हें भी दिल से धन्यवाद।

खबर साभार दैनिक ट्रिब्यून 

भाषायी दरिद्रता के दौर में राहत देता है उत्कृष्ट साहित्य सृजन : डॉ. अमित अग्रवालडॉ. शमीम शर्मा और डॉ. सरिता शर्मा की पुस्तक 'एक बूंद सौ सवाल' का लोकार्पणचंडीगढ़, 31 जुलाई हाल के दिनों में एक आंदोलन के दौरान युवा वर्ग के कुछ लोगों की भाषा-शैली और उसमें प्रयुक्त शब्दों ने बहुत दुख पहुंचाया। लगा जैसे भाषा की शून्यता हो गयी है। भाषायी दरिद्रता का यह दौर और कितना खतरनाक होगा कहा नहीं जा सकता, लेकिन इसी दौर में राहत की बात यह भी है कि कुछ लोग साहित्य सृजन, खासतौर पर हिंदी में उत्कृष्ट लेखन कर रहे हैं। यह बात हरियाणा सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में आयुक्त और सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने कही। वह लेखिका द्वय डॉ. शमीम शर्मा एवं डॉ. सरिता शर्मा की पुस्तक 'एक बूंद सौ सवाल' के विमोचन कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दैनिक ट्रिब्यून के संपादक नरेश कौशल ने की। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि हरियाणा उर्दू अकादमी के निदेशक डॉ. चंद्र त्रिखा मौजूद रहे।  डॉ. अग्रवाल ने कहा कि अपनी भाषा पर हम सबको गर्व होना चाहिए। अलग-अलग बोलियों में ही सही हिंदी आज सर्वाधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। यह बात दुखद है कि बेहतरीन साहित्य सृजन कम हो रहा है। उन्होंने कहा, 'इस किताब में पानी के सभी आयामों को जोड़ा गया है। हर आयुवर्ग को समझ आ सकने वाली है और सहज अंदाज में लिखी गयी है।' उन्होंने कहा कि हरियाणा में पानी के महत्व को समझाने के लिए कुआं पूजन जैसे अनेक कार्यक्रम जल बचाओ और स्वच्छता अपनाओ जैसे वैज्ञानिक तरीकों को प्रतीकों में समझाने के लिए होते थे। उन्होंने कहा कि बुलंदियां छू रहीं हरियाणा की बेटियों के सुखद सफर में शमीम जैसी कर्मठ कार्यकर्ता और लेखिका का भी योगदान है। पुस्तक लोकार्पण में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. चंद्र त्रिखा ने डॉ. शमीम शर्मा के साहित्यिक सफर की शुरुआत को याद किया और उनकी रचनाशीलता को सराहा। इससे पहले कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत करते हुए अतिथियों के सम्मान में डॉ. शमीम ने कहा, 'तुम हमारे करीब बैठे हो, अब दुआ कैसी और दवा कैसी।' संपादक नरेश कौशल को पत्रकारिता का परचम और निर्भीक बताते हुए उन्होंने कहा, 'जहां से तेज हवाओं का आना-जाना है, कुछ भी हो चिराग वहीं जलाना है।' किताब की दूसरी लेखिका डॉ. सरिता शर्मा ने पुस्तक के बारे में संक्षेप में बताया। कुछ प्राध्यापिकाओं ने पानी से संबंधित दो गीत 'ओहरे ताल मिले नदी के जल में...' और 'पानी रे पानी तेरा रंग कैसा...' गाकर समां बांध दिया। अंत में छोटी सी बच्ची नदिया ने एक प्यारी सी कविता के माध्यम से धन्यवाद ज्ञापित किया। -

कुछ व्यक्तित्व समय की पहचान बन जाते हैं : नरेश कौशल

पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं दैनिक ट्रिब्यून के संपादक नरेश कौशल ने डॉ. शमीम शर्मा के साथ चार दशकों के सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके पहले कार्यकाल में 'चौपाल से' और अब 'तिरछी नजर' स्तंभ में वह लगातार छपती रहती हैं। व्यंग्य के इस इस कॉलम में उनके चुटकुले के दो किरदारों को उन्होंने याद किया तो सभागार में जोरदार तालियां बजीं। कौशल ने कहा, 'कुछ व्यक्तित्व अपने समय में केवल उपस्थित नहीं होते, वे अपने समय की पहचान बन जाते हैं। डॉ. शमीम शर्मा ऐसा ही एक नाम हैं, जिन्होंने शिक्षा, साहित्य, समाजसेवा और सांस्कृतिक चेतना को अपने जीवन का ध्येय बनाया। कहानी, कविता, व्यंग्य, आत्मकथा, स्त्री-विमर्श और हरियाणवी हास्य-साहित्य हर विधा में डॉ. शमीम शर्मा ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। हरियाणवी भाषा को साहित्यिक गरिमा प्रदान करने में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है।' उन्होंने डॉ. शमीम के कृतित्व का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा, 'डॉ. शमीम शर्मा का व्यक्तित्व साहित्य तक सीमित नहीं है। सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनका योगदान समान रूप से प्रेरणादायी रहा है।'




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