केवल तिवारी
चंडीगढ़ आए हुए मुझे धीरे-धीरे डेढ़ दशक होने को है। दैनिक ट्रिब्यून में आकर यहां भी डेस्क की नौकरी के साथ-साथ कुछ-कुछ कवरेज के लिए भेजा जाता रहा। इस दौरान रचनाधर्मिता की बातें भी होतीं। कभी ऑफिस में और कभी ऑफिस के बाहर। बातों-बातों में कुछ लोगों ने अपनी रचनाएं पढ़ने को दीं। कुछ ने थोड़ी-बहुत मेरी भी सुन लीं। फिर मैंने बताया कि वर्ष 2000 के आसपास हम कुछ साहित्य प्रेमियों ने गाजियाबाद में 'बैठक' की शुरुआत की थी। हम लोग आपस में पूछते थे कि अगली बैठक किसके घर है। वहां अनेक वरिष्ठ लेखक आते थे। एक-दो बार मुझे भी अपनी कहानी सुनाने का मौका मिला। मैंने उस वक्त आइडिया दिया कि इसे ऑनलाइन मंच पर भी लाया जाये। मैंने शुरुआत भी की। लेकिन देखा कि एक बार मेरी कहानी पर जब कुछ साथियों ने आलोचनात्मक टिप्पणी की तो एक-दो वरिष्ठ लोगों ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। उनका इनकार मुझे दुत्कार जैसा लगा। मेरा कोई ऐसा बैकग्राउंड नहीं। कोई गॉड फादर नहीं। मैंने उन्हीं लोगों में से अनेक को सुना है एक युवा लेखक की बेहद तारीफ करते हुए। ये लोग तारीफ में भी बैकग्राउंड या भविष्य की संभावनाएं देखते थे। मुझे वह इनकार चुभ गया। मैं धीरे-धीरे से बैठक से दूर हो गया। कुछ दिनों बाद पता चला कि बैठक ज्यादा नहीं चल पाई। बैठक आगे न बढ़ पाने का तो मुझे बेहद दुख हुआ, लेकिन यह विचार मुझे बहुत पसंद आया। चंडीगढ़ आकर यहां भी अनेक लोगों से चर्चा की। उनमें से कुछ बहुत बुजुर्ग हो चुके हैं। एक महिला साहित्यानुरागी की तो असमय मौत ही हो गयी। यहां मैंने भी यह राय रखी। अनेक लोगों ने सहमति भी जताई। मैंने यह भी आइडिया दिया कि अगर इसे 'मॉनीटरी' कर दें। यानी आर्थिकी से जोड़ दें तो बहुत अच्छा रहेगा। जैसे हर माह सौ, दो सौ रुपये भी जमा करते रहें। और जरूरी हो तो उस पैसे को आपस में ही लोन की तरह बांटे। ब्याज फिक्स कर दें। साल के अंत में उस ब्याज से या तो कोई कार्यक्रम कर लें या आपस में बांट लें। ऐसा करने से जुड़ने का एक और कारण बन जाएगा और आर्थिकी कई बार बड़ा काम कर जाती है। कुछ लोगों ने कहा कि हर महीने प्रेस क्लब मिल लिया करेंगे। खैर... बातें होती रहीं। अनेक लोग सेवानिवृत्त हो गये। जीवन की आपाधापी में सब खो गये। मैं भी। जो थोड़ा बहुत लेखन का कीड़ा था उसे अपने ब्लॉग ktkikanw-kanw.blogspot.com पर लिखता रहा। थोड़ा बहुत मौका मुझे अखबार में लिखने का भी मिलता रहा। जीवन चलता रहा। इस बीच 27 मई, 2026 को ट्रिब्यून चौक के पास नोवोटेल (NOVOTEL Hotel)में एक कार्यक्रम कवर करने के लिए संपादक जी द्वारा भेजा गया। वहां जाकर देखा कि 'राइटर्स फोरम' की जो भव्य और दिव्य शुरुआत इस सिटी ब्यूटीफुल में हो रही है, वह तो करीब तीन दशक पुराना हमारे जैसे लोगों का भी आइडिया था। खैर इस कार्यक्रम में गया तो उनकी बातें अच्छी लगीं। बातें तो हमेशा ऐसी अच्छी ही होती हैं। वह धरातल पर कितना उतर पाएगा, यह देखने वाली बात है। इस कार्यक्रम की पीआर एजेंसी द्वारा भेजी गयी प्रेस विज्ञप्ति और फिर मेरे द्वारा लिखी गयी खबर को नीचे हू-ब-हू पेस्ट करूंगा। साथ में साभार : dainiktribuneonline.com का लिंक भी।
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अच्छी लगी हिंदी की बात
जैसा कि होता है, Elite Class हमेशा अंग्रेजी से अपनी शुरुआत करता है। यहां भी वैसा ही दिखा। फिर एक नयी शुरुआत देखी कि हर किसी से अपना परिचय देने को कहा गया। मेरी भी बारी आई। मैंने थोड़ा आश्चर्य जताते हुए एक लाइन में अपना परिचय दिया। फिर सवाल-जवाबों का दौर चला। बात जब रचना सुनाने की आई तो ज्यादातर लोगों ने हिंदी में ही सुनाई। एक दो लाइन का बेहद भावुक शेर पंजाबी में भी सुनाई दिया। फिर तो हिंदी में ही चल पड़ा सारा मंजर। अनेक भाषाओं का आना बहुत अच्छी बात है। लेकिन मां भाषा में अपनी भावनाओं को व्यक्त करना शायद ज्यादा आसान होता है। अंग्रेजी को फैशन के तहत अपनाना थोड़ा अजीब दिखता है। यहां पर एक बहुत पुराना किस्सा याद आ रहा है। एक वरिष्ठ पत्रकार का बेटा हिंदुस्तान में एक बार मिला। उससे हम लोगों ने ऐसे भी पूछ लिया कि क्या तुम भी पत्रकारिता में आओगे। उसने कहा, हो सकता है, लेकिन हिंदी पत्रकारिता में तो कतई नहीं। बाद में मेरे एक सीनियर बोले, देखो हिंदी पत्रकारिता में इनके पिता का इतना नाम है, उसी से परिवार चल रहा है, लेकिन ये सज्जन मना कर रहे हैं। आज वह बच्चा काफी बड़ा हो गया है और मीडिया में ही है, हिंदी मीडिया में। रचनाएं भी लिखता है हिंदी में। खैर... आप जितनी भाषाएं जानते हैं ये आपकी योग्यता है। कहीं भी जाएं जिस भाषा में सहज हों, उसे अपनाएं।
लेखक मंच की वह योजना
इस कार्यक्रम की कवरेज के दौरान मुझे अपने समय के वरिष्ठ साहित्यकार रहे भीमसेन त्यागी जी की याद आई। एक बार आकाशवाणी के कार्यक्रम में एक बातचीत कार्यक्रम के लिए टॉलस्टॉय के 'वार एंड पीस' पर उनसे कुछ जानने के लिए गया था। माध्यम बने मित्र अनुराग। अनुराग भी साहित्यानुरागी हैं। अपना यूट्यूब चैनल भी चलाते हैं। तब त्यागी जी ने कहा था कि मेरा सपना है लेखक मंच बनाने का। मंच ही नहीं, लेखक गांव बनाने का। जहां रचनाशील लोग अपनी कलम से बेहतरीन रचनाएं सृजित करें। बाद में उन्होंने लेखक मंच के नाम से पत्रिका भी निकाली। मेरे भी कुछ संस्मरण उसमें छपे। बाद में त्यागी जी दुनिया से रुखसत हो गये। आर्थिक तंगी आई। वह सपना पूरा नहीं हो पाया, लेकिन अनुराग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसे जिंदा रखे हुए हैं। अभी तो कुछ बाध्यताएं हैं, लेकिन भविष्य में उसके साथ पूरी तरह जुड़ुंगा।
कुछ सरकारें भी कर रही हैं ऐसा... लेकिन
लेखकों के लिए विशेष ग्राम यानी लेखक ग्राम की जिस सपने की बात मैंने ऊपर की थी, उसकी एक शुरुआत उत्तराखंड में हुई है, लेकिन उसमें भी अनेक किंतु-परंतु हैं। सवाल चाहे जो भी हों, लेकिन शुरुआत तो हुई है। बताया जा रहा है कि दक्षिण के कुछ राज्य भी ऐसा करने की योजना में हैं। कुछ राज्य बेहतरीन साहित्य को आंचलिक भाषा में अनुवाद कराने की भी योजना को सिरे चढ़ाते दिख रहे हैं। हालांकि अनुवाद का काफी काम अब कृत्रिम मेधा यानी artificial inteligence AI के जरिये होने लगा है लेकिन साहित्य की आत्मा को बचाये रखने के लिए इसे साहित्यकारों के जरिये ही करवाया जाना चाहिए।
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अब वह खबर जो Writer's Forum की तरफ से बतौर रिलीज भेजी गयी। उसके बाद मेरी खबर साभार : Dainik Tribune और कुछ फोटो।
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प्रेस विज्ञप्ति
राइटर्स फोरम (डब्ल्यूएफ) का अनावरण: साहित्यिक अभिव्यक्ति और समावेशी रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने का उद्देश्य
मौलिकता, लोकतांत्रिक भागीदारी और सार्थक साहित्यिक जुड़ाव को प्रोत्साहित करने के लिए नया मंच
• संस्थापक और मुख्य सदस्यों की परिकल्पना — एक जीवंत समुदाय जहाँ हर लेखक को अपनी आवाज और अपनापन मिले
चंडीगढ़, 27 मई 2026: एक नए साहित्यिक समूह राइटर्स फोरम (डब्ल्यूएफ) का औपचारिक शुभारंभ चंडीगढ़ राजधानी क्षेत्र और उससे आगे के साहित्यिक समुदाय के लिए किया गया। इसका उद्देश्य लेखकों, कवियों, आलोचकों और साहित्य-प्रेमियों के लिए एक समावेशी, बौद्धिक रूप से समृद्ध और लोकतांत्रिक मंच तैयार करना है।
जहाँ शब्दों को अपनी आवाज़ मिले, जहाँ लेखक अपने समुदाय से मिलें’ — इस मूल विचार पर स्थापित यह मंच लोकप्रियता या सामाजिक प्रभाव की सीमाओं से परे जाकर प्रामाणिक साहित्यिक अभिव्यक्ति और सार्थक रचनात्मक सहभागिता को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।
यह मंच प्रसिद्ध कवयित्री और लेखिका सुधा अग्रवाल के नेतृत्व में स्थापित किया गया है। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि इस फोरम की स्थापना ऐसे साहित्यिक वातावरण की आवश्यकता से हुई, जहाँ लेखकों का सम्मान उनके विचारों की ईमानदारी और अभिव्यक्ति की शक्ति के आधार पर हो, न कि बाहरी मान्यता या सामाजिक प्रतिष्ठा के आधार पर।
उल्लेखनीय है कि सुधा अग्रवाल का कविता-संग्रह हिरायथ वर्ष 2023 में टैगोर थिएटर में लॉन्च किया गया था। उनकी कविता-पुस्तक पर आधारित एक पिक्चर सहगल हाउस को द नैरेटर्स आर्ट सोसाइटी द्वारा रूपांतरित भी किया गया।
उन्होंने कहा कि राइटर्स फोरम केवल एक और साहित्यिक समूह नहीं है। यह एक गंभीर प्रयास है — ऐसा रचनात्मक समुदाय बनाने का, जहाँ लेखक निर्भय होकर स्वयं को व्यक्त कर सकें, सार्थक भागीदारी निभा सकें और संवाद तथा पारस्परिक सम्मान के माध्यम से सामूहिक रूप से विकसित हो सकें।
फोरम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह मंच उभरते लेखकों को आत्मविश्वास और गरिमा के साथ आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करेगा, बिना किसी भय या दबाव के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करेगा, मौलिकता और वास्तविक प्रतिभा को संरक्षित करेगा, प्रत्येक सदस्य को नेतृत्व के अवसर देगा और गंभीर सुनवाई तथा सार्थक संवाद के माध्यम से सम्मानजनक साहित्यिक सहभागिता सुनिश्चित करेगा।
फोरम का उद्देश्य लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर कार्य करना भी है, जहाँ निर्णय सामूहिक रूप से बहुमत की सहमति से लिए जाएँगे ताकि पारदर्शिता और समान भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
प्रख्यात लेखिका, साहित्यिक आलोचक और पूर्व अंग्रेज़ी के प्रोफेसर डॉ. मंजीत कौर ने कहा कि आज के तेज़ी से बदलते साहित्यिक परिवेश में ऐसे मंचों की आवश्यकता बढ़ती जा रही है । राइटर्स फोरम अर्थपूर्ण साहित्यिक संवादों को पुनर्जीवित करने का प्रयास करेगा।”यह उल्लेखनीय है कि डॉ. कौर को लिटरेरी एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है तथा उन्हें वर्ष 2018 में दुबई में अंतरराष्ट्रीय पहचान भी प्राप्त हुई थी।कवयित्री, शिक्षाविद् और नेशनल डेंटल कॉलेज, डेराबस्सी में प्रोस्थोडोंटिक्स विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनु गिरधर ने कहा कि कोई भी साहित्यिक मंच तभी सार्थक बनता है जब वह लोगों को अपनी रचनात्मक आवाज़ खोजने की प्रेरणा दे। यह पहल ऐसा ही वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है ।डॉ. गिरधर पाँच कविता पुस्तकों की लेखिका हैं और उन्हें वर्ष 2022 में रवीन्द्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।वर्डस देट विस्पर की लेखिका तथा अमैरा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में डायरेक्टर (ऑपरेशंस) सीमा शर्मा ने कहा कि साहित्य वहीं फलता-फूलता है जहाँ संवेदनशीलता, गंभीर सुनवाई और सम्मानजनक संवाद को पोषित किया जाता है। हमारा प्रयास ऐसा मंच तैयार करना है जहाँ लेखक केवल अपनी रचनाएँ साझा न करें, बल्कि एक-दूसरे की यात्राओं और दृष्टिकोणों से वास्तविक रूप से जुड़ सकें प्रेम, विरह और मानवीय भावनाओं की काव्यात्मक अभिव्यक्तियों के लिए प्रसिद्ध चंडीगढ़ के कवि और उपन्यासकार संजीव बंसल ने कहा कि “साहित्य मौन को भाषा देता है और मानवीय संवेदनशीलता को गरिमा प्रदान करता है।” उनके अनुसार दृश्यता और मान्यता की दौड़ में मौलिकता अक्सर दब जाती है। राइटर्स फोरम लेखकों को यह याद दिलाने का प्रयास करेगा कि स्थायी साहित्य ईमानदारी, गहराई और जीवन के वास्तविक अनुभवों से जन्म लेता है। फोरम की योजना नियमित साहित्यिक सत्रों, कविता-पाठ, चर्चाओं, कार्यशालाओं और संवादात्मक कार्यक्रमों के आयोजन की है, जिनका उद्देश्य क्षेत्र और उससे बाहर के लेखकों के बीच रचनात्मकता, सहयोग और बौद्धिक विकास को प्रोत्साहित करना होगा।
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और जो मैंने खबर छापी साभार दैनिक ट्रिब्यून
आभासी और जुगाड़ू दुनिया के तिलिस्म से मौलिकता को बचाने की कवायद
चंडीगढ़ में 'राइटर्स फोरम' की औपचारिक शुरुआत
केवल तिवारी/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 27 मई हिंदी में रचनाशीलता की बात। पंजाबी, अंग्रेजी और उर्दू साहित्य की बात। बात पुराने 'कॉफी हाउस चर्चा' की, जहां बैठकर लेखक लोग कहानी, कविता और अन्य विधाओं की रचनाओं पर समालोचनात्मक टिप्पणियां कर सकें। बात आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के दौर में मौलिकता की। बात प्रोत्साहन की भी। बात 'जुगाड़ू' दुनिया से इतर मेहनत की। ये सारी बातें हुईं चंडीगढ़ में एक नये साहित्यिक समूह 'राइटर्स फोरम' (डब्ल्यूएफ) के औपचारिक शुरुआत के मौके पर। फोरम का उद्देश्य साहित्य प्रेमियों और रचनाधर्मिता के लिए मंच प्रदान करना है। दावा है कि यह ऐसा मंच होगा जो 'घेराबंदी' से मुक्त होगा। फोरम में फिलवक्त 30 प्रतिष्ठित लोग जुड़े हैं, जो अपने विभिन्न माध्यमों से किसी भी रचनाशील व्यक्ति की कृति को हजारों लोगों तक पहुंच मुहैया कराएंगे। कवयित्री और लेखिका सुधा अग्रवाल के नेतृत्व में स्थापित इस फोरम की खास बात होगी कि यहां मौलिकता को ही प्राथमिकता दी जाएगी और नवोदित लेखकों की हर संभव मदद की जाएगी। सुधा का कविता संग्रह हिराएथ आ चुका है और इसका नाट्य रूपांतरण भी हो चुका है। फोरम से जुड़ीं लेखिका, आलोचक एवं अंग्रेजी की प्रोफेसर रहीं डॉ. मंजीत कौर ने कहा, 'राइटर्स फोरम अर्थपूर्ण और भावपूर्ण लेखन को सार्थक मंच देगा।' लिटरेरी एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित डॉ. कौर ने कहा कि मूल लेखन आज की जरूरत है। कवयित्री, शिक्षाविद और नेशनल डेंटल कॉलेज, डेराबस्सी में प्रोस्थोडॉन्टिस विभाग की अध्यक्ष डॉ. अनु गिरधर ने सीखने और सृजनशील बनने की जरूरत पर बल दिया। डॉ. अनु की पांच किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। ख्यात कवयित्री एवं लेखिका लिली स्वर्ण ने कहा कि मौलिकता अपना स्थान स्वयं बना लेती है।
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मासिक गोष्ठियों में मोबाइल बैन :मंचासीन फोरम सदस्यों ने कहा कि सार्थक चर्चा के लिए हम लोग मासिक गोष्ठियों में मोबाइल बैन कर देते हैं। उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग पुरस्कारों, चर्चाओं के इर्द-गिर्द होते हैं। समय आने पर ऐसी चौकड़ी से बाहर निकलकर वास्तविक लेखकों के लिए उनका फोरम पुरजोर मेहनत करेगा। उन्होंने कहा कि फोरम से कोई भी जुड़ सकता है, बस संवेदनाओं के साथ अपनी रचनाशीलता होनी चाहिए। फोरम फिलहाल देश के विभिन्न कोनों से साहित्य प्रेमियों से जुड़ा है। आगे चलकर इसे वैश्विक बनाने की कोशिश रहेगी।


2 comments:
मौलिकता बड़ी चुनौती
नवोदितों को मौका मिलना चाहिए। अच्छी पहल
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