indiantopbligs.com

top hindi blogs

Sunday, October 11, 2026

 साभार: दैनिक ट्रिब्यून 

दैनिक ट्रिब्यून में छपी समीक्षा 


केवल तिवारी

जिस दौर में माध्यमिक या उच्चतर माध्यमिक तक की पढ़ाई भी बहुत बड़ी बात मानी जाती थी, उस दौर में बीटेक, वह भी आईआईटी खड़गपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से। अंदाजा लगाया जा सकता है व्यक्ति विशेष की अध्ययनशीलता का और बुद्धिमत्ता का। बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में ऐसे व्यक्ति की सेवा ली गयी तो उन्होंने बार-बार की इन समस्याओं की तह तक जाने की कोशिश की और तमाम शोध कार्य के बाद तैयार की पुस्तक। पुस्तक का नाम है- 'पानी का शाप : बिहार में बाढ़-सुखाड़।' लेखक हैं दिनेश कुमार मिश्र। आजादी के साल से लेकर पंचवर्षीय योजनाओं के दौर की शुरुआत तक का यह दस्तावेज बिहार के विभिन्न इलाकों, खासतौर पर सूखा या बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों पर केंद्रित है। एक तरफ प्रकृति का रौद्र रूप, दूसरी ओर शासन-प्रशासन की कुव्यवस्थाओं का दंश। लेखक ने उस दौर में कड़ी मेहनत कर संबंधित सरकारी कागजात देखे, पुस्तकालयों की धूल फांकी और पूरी किताब तैयार की। इस कार्य में मददगारों का भी विवरण देते हुए आईआईटीयन दिनेश कुमार मिश्र की इच्छा हैकि वर्ष 1956 से अब तक भी दस्तावेज तैयार किया जाये। वर्ष 1947 से 1956 तक साल दर साल कहीं बाढ़ और कहीं सूखा से दो-चार होते लोगों की व्यथा-कथा के साथ ही लेखक ने उन तकनीकी शब्दों के लिए भी अलग से अध्याय दिया है जो प्रशासनिक या वैज्ञानिक शब्दावली का हिस्सा होते हैं। बेहद गंभीर शोध के बाद तैयार इस किताब में जहां नये शोधार्थियों के लिए बहुत कुछ है, वहीं नीति नियंताओं के लिए संदेश भी। आखिर राहत सामग्री देकर ढोल पीटने वाले हुक्मरान समस्या का मूल समाधान क्यों नहीं करते, जबकि समय-समय पर संबंधित अधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सत्तासीनों द्वारा कई सुझाव दिए गए। सरल-सहज भाषा और शैली में बिहार के संदर्भ में तैयार यह किताब बेहतरीन शोधग्रंथ है। इसका बहुआयामी सदुपयोग हो सकता है। 

पुस्तक : पानी का शाप : बिहार में बाढ़-सुखाड़, लेखक : दिनेश कुमार मिश्र, प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन, पृष्ठ : 432, मूल्य : 599 रुपये

No comments: