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Thursday, October 29, 2026

काश ऐसे ही हों बैंकों के अधिकारी... मैडम ने वादा किया और पूरा किया

केवल तिवारी

करीब एक साल पहले एक प्राइवेट बैंक में खाता खुलवाया। अभी नाम का खुलासा नहीं कर रहा हूं न तो बैंक का और न ही बैंक की महिला अधिकारी का। उनसे अनुमति नहीं ले पाया। अनुमति मिलेगी तो पूरा जिक्र करूंगा। हो सकता है सचित्र। मुझे खाता खुलवाना जरूरी था। मैं ब्रांच में गया तो संबंधित बैंक अधिकारी मिलीं। उस वक्त वह कैश काउंटर में अपने सहयोगी से कुछ बात कर रही थीं। गार्ड ने मुझसे काम पूछा, मैंने नया अकाउंट खुलवाने की बात कही। हमारी बात मैडम ने सुन ली और उन्होंने दो टूक कहा- 25 हजार रुपये मिनिमम बैलेंस है हमारे यहां। मुझे व्यवहार बड़ा रूखा सा लगा, लेकिन फिर भी पूछ ली क्या-क्या औपचारिकताएं हैं। मैं अगले दिन संबंधित डॉक्यूमेंट और पत्नी के अकाउंट का एक चेक लेकर चला गया। मैडम ने मुझे बैठने के लिए कहा और करीब 15 मिनट में मेरा अकाउंट खुल गया। साथ ही मोबाइल एप आदि भी इंस्टॉल हो गया। फिर उन्होंने कहा कि चूंकि यह चेक आपकी पत्नी का है, इसलिए हो सकता है कि फिजिकल वेरिफिकेशन करना पड़े। मैंने अपना एड्रेस बता दिया और कहा कभी भी। दो दिन बाद मैडम का फोन आया कि आपका खाता ऑपरेटिंग मोड में आा गया है। आपको अपने नाम से चेक बुक चाहिए तो मिल जाएगी। इस तरह सभी काम स्मूथली होने लगे और जिन मैडम का व्यवहार मुझे शुरू में रूखा लगा रहा था, वह बहुत मिलनसार लगीं। करीब महीनेभर बाद मैं अपनी पासबुक में एंट्री कराने गया। उन्होंने कहा कि आज मशीन खराब है, प्लीज आप कल आना। मैं अगले दिन गया। उस दिन भी कुछ तकनीकी दिक्कत थी, लेकिन उन्होंने अपने किसी साथी कर्मी से कहा कि इस पासबुक में एंट्री में कोई इश्यू आ रहा है। आप कैश काउंटर पर जाकर नयी पासबुक में पूरी एंट्री करके दे दो। उन्होंने मुझे बैठने को कहा। मैं उनकी कुछ परेशानी समझ रहा था, मैंने कहा- मैडम कोई बात नहीं, फिर करा लेंगे। उन्हें राहत मिली। अगले दिन उनका फोन आ गया, आप पासबुक ले जाइये। मैं तुरंत तो नहीं जा पाया, लेकिन मन में शुक्रिया का भाव आया कि कैसे बैंक अधिकारी ने खुद फोन किया। इस तरह कभी मुझे एप संबंधी दिक्कत आती तो मैं बैंक चला जाता। सिलसिला चला और मेरी सैलरी का बैंक में जाना, वहां से तमाम किस्तों का कटना जारी रहा। इसी बीच एक दिन बैंक की अधिकारी मैडम का फोन आया कि आपके लिए एक ऑफर है। क्रेडिट कार्ड का। लाइफ टाइम फ्री है। कार्ड के नाम पर फ्रॉड की खबरें मैं अक्सर पढ़ता हूं, खुद ऐसी खबरों को अपने अखबार दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित करने की पहल करता हूं। ताकि लोग सचेत हो जाएं। मैंने कहा, नहीं मुझे भरोसा नहीं हो रहा। उन्होंने मेरी पिछली कुछ ट्रांजेक्शन के बारे में बताया और कहा कि मैं बैंक अधिकारी बोल रही हूं। असल में, इससे पहले लैंडलाइन से शायद बात हुई थी या फिर मैंने नंबर सेव नहीं किया था। ट्रू कॉलर भी नंबर को सही दिखा रहा था। मैडम मेरे संकोच को समझ गयीं और बोलीं- आप कार्ड के लिए हां कर दीजिए, लाइफ टाइम फ्री नहीं हुआ तो कैंसल हो जाएगा। साथ ही ताकीद की कि आप पिन जनरेट मत करना। पता नहीं किन कारणों से मैंने हां कर दी। उसके बाद भी एक ब्लॉग लिखा। मैडम ने कहा एक ओटीपी आएगा। मैंने डरते-डरते ओटीपी भी बता दिया। एक-दो दिन मैं अपनी करनी पर पछताता रहा। जब देखा सब सामान्य है और बैंक से कार्ड बनने की प्रक्रिया का मैसेज आ रहा है तो विश्वास हो गया कि फोन सही व्यक्ति का था। कुछ दिनों बाद कार्ड बनकर आ गया। साथ ही उसमें साफ लिखा था कि सालाना उसकी फीस होगी। मैंने मैडम को फोन किया। उन्होंने कहा कि कार्ड लेकर आप ब्रांच आ जाइये। वहां उन्होंने किसी व्यक्ति को फोन किया। फिर कहा, सर आप पिन जनरेट मत कीजिए। इसे कैंसल करा देंगे। मैं ये सोचकर घर आ गया कि कैंसल हो या न हो, अधिकारी का सपोर्ट तो पूरा है। पूरी कहानी का लब्बोलुआब यह है कि पिन जनरेट नहीं करने पर भी कार्ड का बिल जनरेट हो गया और मुझे मैसेज आने लगे। इस बीच, मैडम बैंक ऑडिट में बिजी रहीं। एक दिन उनका फोन आया। उन्होंने ब्रांच में बुलाया और फाइनली कार्ड को ब्लॉक करवा दिया। उनका सहयोग देख मुझे बहुत अच्छा लगा और एक शेर याद आया, जिसके अल्फाज इस तरह से हैं-

आदमी का आदमी हर हाल में हमदर्द हो।

इक तवज्जोह चाहिए इंसाँ को इंसाँ की तरफ़।। 

प्रसंगवश यहां बता दूं कि एक दूसरे निजी बैंक से बहुत कड़वा अनुभव रहा। वह प्रकरण अभी जारी है। इसलिए कहानी का खुलासा बाद में। फिलहाल उक्त मैडम का धन्यवाद।

1 comment:

Anonymous said...

Very nice अच्छे लोग भी हैं दुनिया में तभी चल रही है दुनिया